पटना (मानवीय सोच) बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर का रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताए जाने के बाद जहां साधु-संतों के साथ आम लोगों में आक्रोश है, वहीं इसको लेकर बिहार में सियासत भी काफी गर्म हो गई है. बीजेपी के हमलों के बीच जदयू ने जहां राजद कोटे के मंत्री चंद्रशेखर के बयान पर जहां सवाल खड़ा कर दिया वहीं, अब तक खामोश रहा राजद भी खुलकर अपने नेता के समर्थन में आ गया है.
बिहार राजद अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि समाजवादियों ने जो राह दिखाई उसे चंद्रशेखर आगे बढ़ा रहे हैं. पूरा राजद चंद्रशेखर के साथ खड़ा है. घबराने की जरूरत नहीं, हम कमंडलवादियों को सफल नहीं होने देंगे.
राजद और जदयू हुआ आमने-सामने
रामचरितमानस पर जहां राष्ट्रीय जनता दल शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के बयान पर खुलकर समर्थन में उतर आया है, वहीं जदयू ने शिक्षा मंत्री के बयान का कड़ा विरोध जताते हुए बयान वापस लेने की मांग की है. मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, शिक्षा मंत्री के बयान की हम निंदा करते हैं. रामचरितमानस, कुरान, बाइबिल पर हमें नहीं बोलना चाहिए. रामचरितमानस पर बोलने से समाज में असमंजस होगा.
अशोक चौधरी ने रामचरित मानस का दोहा पढ़कर मंत्री चंद्रशेखर को नसीहत देते हुआ कहा कि कहीं का चौपाई उठाकर कहीं नहीं रखा जा सकता है. चंद्रशेखर ने कहीं की चौपाई कहीं जोड़ दी है. धार्मिक भावना से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है. शिक्षा मंत्री के बयान की हम निंदा करते हैं.
अशोक चौधरी ने आगे कहा, रामचरितमानस, कुरान, बाइबिल पर हमें नहीं बोलना चाहिए. हर घर में राम चरितमानस का पाठ होता है. घर-घर में राम की पूजा होती है. रामचरितमानस पर बोलने का मतलब है कि सनातन हिंदुओं की भावना को ठेस पहुंचाना. प्रोफेसर चंद्रशेखर के बयान से विरोधियों को बल मिला है.
