लखनऊ में इस जगह है श्री कृष्ण भगवान की हवेली

लखनऊ : (मानवीय सोच)  लखनऊ में श्री कृष्ण भगवान की 112 साल पुरानी हवेली है जहां पर उनके बाल रूप के दर्शन होते हैं. यह हवेली बेहद अद्भुत है क्योंकि यहां पर ठाकुरजी को बाजार के बने हुए फूल – माला और भोग नहीं लगता है. भक्त यहां पर सुबह आते हैं. अपने हाथों से फूल माला बनाते हैं और यहीं पर प्रसाद बनाकर ठाकुर जी को चढ़ाते हैं. यहां पर भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की मौजूदगी मानी जाती है , इसीलिए यहां पर सख्त नियम रखे गए हैं.

बात करें इस हवेली के इतिहास की तो यहां के अध्यक्ष लक्ष्मीचंद रस्तोगी ने बताया कि 112 साल पहले दुलारी देवी नाम की एक सदस्य यहां पर हुआ करती थी. वह महाराजा गोवर्धन लाल के यहां ठाकुर जी के बाल रूप को देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी और उन्होंने महाराज से विनती की थी कि उन्हें यह बाल रूप दे दिया जाए. वह लखनऊ में इसे स्थापित करके पूजा आराधना करेंगी लेकिन महाराज ने मना कर दिया था. ऐसे में वह – वहीं पर अनशन करने लगी थीं. महाराज से वहां की प्रजा ने विनती की थी कि इस महिला को यह बाल रूप दे दिया जाए. लोगों के कहने पर महाराज मान गए और उन्होंने दुलारी देवी को बुलाकर यह कहा था कि वह खुद ही लखनऊ ठाकुर जी के बाल रूप को लेकर लखनऊ आएंगे और तब तक के लिए वह लखनऊ जाकर उनके लिए व्यवस्था करें. साल 1912 में महाराज ठाकुर जी को लेकर लखनऊ पहुंचे तो उनके स्वागत में भारी भीड़ जुटी हुई थी. मंदिर तक वह लेकर के आए और इसके बाद उनकी स्थापना की और यहीं से पूजा शुरू हो गई. उन्होंने बताया कि दुलारी देवी को ठाकुर जी ने स्वयं दर्शन भी दिए थे. ऐसा भी कहा जाता है कि श्रीकृष्ण भगवान साक्षात अपने बाल रूप में यहां पर मौजूद हैं.

राग-भोग और श्रृंगार में होते हैं दर्शन
इस हवेली को मंदिर नहीं कहा जाता है क्योंकि यहां पर भगवान श्री कृष्ण के रहने का स्थान है- इसे नंदालय कहा जाता है. यहां पर सुबह सबसे पहले राग होता है, फिर भोग चढ़ता है. इसके बाद उनका श्रृंगार होता है. पालना 10:30 बजे खुलता है जिसमें श्री कृष्ण भगवान को जगाया जाता है और झूला झुलाया जाता है. फिर भोग लगता है. इसके बाद श्रृंगार होता है. भक्त इसी दौरान उनके अद्भुत दर्शन कर पाते हैं. सुबह 8:00 बजे के करीब आरती होती है. हवेली सुबह 7:30 बजे खुल जाती है. यहां पर श्री कृष्ण भगवान के अलावा कोई भी दूसरे देवी देवता के दर्शन नहीं होते हैं. अध्यक्ष लक्ष्मी चंद रस्तोगी ने बताया कि यहां पर ठाकुर जी की फोटो खींचना या वीडियो बनाना पूरी तरह से मना है क्योंकि यहां पर उनका बाल रूप है ऐसे में उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो इस बात का ध्यान रखा जाता है.

ठाकुर जी ने बिगड़े काम बनाए हैं
यहां मौजूद भक्तों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ठाकुर जी के दर्शन करने के लिए यहां पर रोज आते हैं. यहां कीर्तन होता है और उन्होंने कई लोगों के बिगड़े काम बनाए हैं. यहां दर्शन करने से शांति की अनुभूति होती है.

यह है लोकेशन
इस हवेली के दर्शन करने के लिए आपको रकाबगंज चौराहे से बाएं मुड़ना होगा. इसके बाद करीब 500 मीटर से ज्यादा आगे जाने पर आपके दाएं हाथ पर यह हवेली मिल जाएगी.

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