प्रमुख शहरों में सिंथेटिक ड्रग का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। नोरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में सिंथेटिक दवाओं का सालान करीब सौ करोड़ से अधिक का करोबार हो रहा है। लेकिन वैध दवाओं की शक्ल में बिक रहा यह नशा मुश्किल से 10 फीसदी ही पकड़ में आ रहा है। शुक्रवार को एसटीएफ ने ट्रॉमाडोल टैबलेट्स के साथ तीन युवकों को गिरफ्तार किया। इनसे पूछताछ में सामने आया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दवाओं की बिक्री कर रहे थे। यह इनपुट मिलने के बाद एनसीबी की टीम इस सिंडिकेट का पता लगाने में जुट गई है नॉरेकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच में सामने आया कि रेव पार्टियों के बढ़ते चलन ने सिंथेटिक ड्रग के कारोबार को बढ़ा दिया है।
नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम जैसे शहरों के बाद लखनऊ में भी यह तेजी से पैर पसार रहा है। गांजा, चरस, अफीम जैसे प्राकृतिक मादक पदार्थों से तैयार होने वाले नशे के मुकाबले रसायनिक तत्वों से बनाए जा रहे सिंथेटिक ड्रग आसानी से सुलभ और ज्यादा उत्तेजक हैं। इसलिए युवा जल्दी इसकी लत पकड़कर नशे के दलदल में फसते जा रहे हैं। इसमें कुछ दवाएं ऐसी भी हैं जिनकी एक डोज ही जिंदगी के लिए घातक साबित हो सकती है। नॉरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने चार साल में जितने मादक पदार्थ पकड़े उनमें 20 से 30 फीसदी सिंथेटिक ड्रग शामिल हैं। 2020 से अबतक एनसीबी ने प्रदेश भर से करीब 60 हजार किलो मादक पदार्थ पकड़े हैं। इनकी बाजार कीमत 400 करोड़ रूपये से ज्यादा है। इसमें बड़ी मात्रा में नाइट्राजपॉम, अल्प्राजोलम, क्लोनाजपॉम, एमडीएम, एलएसडी और नशीली दवाओं में उपयोग होने वाला घातक रसायन एसिटिक एनहाइड्राइड शामिल है।
