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मुस्लिमों में आइब्रो बनवाना, हेयर स्टाइल और ट्रांसप्लांट नाजायज

बरेली:  (मानवीय सोच)  मुस्लिम महिलाओं या पुरुषों का आइब्रो (भौंह) बनवाना, मुड़वाना या नोचना जायज (मान्य) नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें छंटवा सकते हैं। बरेलवी मसलक (केंद्र) ने मानने वाले सुन्नी मुसलमानों के लिए ऐसे कई निर्णय सार्वजनिक किए हैं। उलमा ने यह भी कहा कि किसी अन्य के बाल अपने सिर पर उगाना जायज नहीं है। बरेलवी मसलक मानने वाले लोग देश, दुनिया से अपने सवाल भेजते हैं। इनमें प्रमुख सवालों पर शरई काउंसिल आफ इंडिया वार्षिक सेमिनार में चर्चा होती है। चर्चा में आप सवाल काजी ए हिंदुस्तान असजद रजा खां के समक्ष पेश करते हैं। वह इन सवालों के जवाब पर अंतिम निर्णय देते हैं।

पिछले दिनों 13 से 15 फरवरी तक दरगाह आला हजरत मदरसा इस्लामिक स्टडी सेंटर में हुए सेमिनार में उलमा के सामने तीन प्रमुख सवाल रखे गए। यूट्यूब से कमाई जायज या नाजायज, इस पर अगले वर्ष निर्णय लेने को कहा गया। इसके अलावा दो अन्य सवालों हेयर ट्रांसप्लांट, आईब्रो बनवाना और एसएमएस पर तलाक देना शरीयता क्या कहती है’, इन पर विमर्श हुआ।

भौंहें छटवाना जायज नहीं

जमात रजा ए मुस्तफा राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने बताया कि उलमा पैनल के सामने एक व्यक्ति का सवाल आया कि हेयर ट्रांसप्लांट उपचार की श्रेणी में आता है या नहीं? इस पर जवाब दिया कि हेयर ट्रांसप्लांट जायज है। इसका संदर्भ था कि यदि किसी कारण से जन्मजात बाल गिर गए तो अपने बाल दोबारा उगवाने का उपचार कर सकते हैं। मगर, अपने सिर पर किसी अन्य व्यक्ति या पशु के बाल उगाना जायज नहीं है। एक अन्य सवाल में भौंहों छांटना और पतली कराना या मुड़वाना नाजायज बताया गया। इसका संदर्भ था कि इसकी मूल स्वरूप में छेड़छाड़ न हो। हेयर संबंधी नियम पुरुष और महिला दोनों पर समान लागू होंगे।

तलाक पर यह कहा

कानूनन तीन तलाक जुर्म है मगर, शरीयत का संदर्भ देकर इस पर लगातार चर्चा हो रही। एक व्यक्ति ने सवाल किया कि शौहर ने बीवी को ‘एक तलाक’ देने के लिए एसएमएस भेजा। वह इसे एक या तीन बार भेजे तो क्या तीन तलाक मानी जाएगी या नहीं ? जवाब आया कि इसे एक तलाक ही माना जाएगा। इस स्थिति में एक तलाक को तीन बार जोर देकर लिखा गया हो। यदि तलाक भेजने से इरादे से मोबाइल फोन पर संबंधित शब्द टाइप कर दिए, तब भी तलाक मान्य होगा। भले ही वह संदेश बीवी को भेजा जाए, या न भेजा जाए। संदेश डिलीट कर देने पर भी तलाक माना जाएगा। एसएमएस को शरीयत की रोशनी में खत या अन्य संदेश साधन की तरह माना गया है। ऐसी स्थिति में एसएमएस पर भेजे गए संदेश जायज माने जाएंगे।

जमात रजा ए मुस्तफा राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने बताया कि तीन दिवसीय सेमिनार में प्रमुख सवाल रखे गए थे। उलमा ने शरीयत की रोशनी में इन पर विमर्श किया था। जिसके बाद काजी एक हिंदुस्तान ने हेयर ट्रांसप्लांट और एसएमएस से संबंधित सवालों के जवाब तय कर दिए हैं।

 

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