वाराणसी (मानवीय सोच) संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन और नागरी प्रचारिणी सभा की दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलाइजेशन के लिए संस्कृति मंत्रालय प्रस्ताव तैयार कर रहा है। पहले चरण में 25 हजार पांडुलिपियों का संरक्षण होगा और इस पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण एवं अनुवाद से दुर्लभ ज्ञान-विज्ञान का लाभ सभी को मिलेगा। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन के सहयोग से विश्वविद्यालय की पांडुलिपियों के संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र को संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन संरक्षण कार्य के लिए सरस्वती भवन का सर्वे करके बजट का प्रस्ताव तैयार करेगा। इसके लिए 50 संरक्षक और चार पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। इसके साथ ही नागरी प्रचारिणी सभा की पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए भी कार्य किया जाएगा। जल्द ही त्रिपक्षीय एमओयू तैयार करके संस्कृति मंत्रालय में स्वीकृति के लिए जमा किया जाएगा।
