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मोदी की गारंटियां राज्यों में जीत का मंत्र साबित हुईं

लोकसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग की अच्छी संख्या वाले राज्यों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी जीत का मंत्र बन सकती है। भाजपा आदिवासी हित और मोदी की गारंटी के अजेय मंत्र के सहारे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे आदिवासी मतदाताओं की अच्छी संख्या वाले राज्यों में समीकरण साधेगी।

वर्ष 2022 व 2023 में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वहां आदिवासी आबादी का आंकड़ा देखें तो मणिपुर में 41 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 34 प्रतिशत, त्रिपुरा में 32 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 23 प्रतिशत और गुजरात में 15 प्रतिशत हैं। इन सभी राज्यों में भाजपा मोदी मंत्र के सहारे सत्ता का रास्ता तय करने में सफल रही है। वोट शेयर 51 प्रतिशत से पार ले जाकर अजेय बनने की रणनीति पर चल रही भाजपा द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर अपने लक्ष्य के करीब पहुंचती दिख रही है।

मोदी की गारंटियां इन राज्यों में जीत का मंत्र साबित हुई

आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) चेहरे को आगे बढ़ाने के साथ मोदी की गारंटियां पार्टी के लिए गुजरात के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जीत का मंत्र साबित हुई हैं। झारखंड, ओडिशा जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में भी यह जीत का मंत्र भाजपा के अनुकूल परिणाम दे सकता है। झारखंड में भी 26.2 प्रतिशत मतदाता जनजातीय वर्ग का है। झारखंड में विधानसभा चुनाव दिसंबर में होना है, जहां मोदी की गारंटी से भाजपा सत्ता में लौट सकती है।

आदिवासी समुदाय का साथ मिलने से बदल सकती है तस्वीर

अब 2024 में आदिवासी समुदाय का साथ मिलने से लोकसभा चुनाव की तस्वीर भी काफी बदल सकती है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में आदिवासी समुदाय भाजपा के साथ था, जब उसे आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 में से 27 सीटें मिली थीं, जो वर्ष 2019 में बढ़कर 31 हो गईं । वर्ष 2009 में भाजपा को 13 सीटें ही मिली थीं।

बस्तर सीट 4.3 प्रतिशत के अंतर से हारी भाजपा

अब भाजपा की नजर लोकसभा की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित उन सीटों पर है, जहां वह दूसरे नंबर पर या बहुत कम अंतर से हारी थी। जैसे छत्तीसगढ़ की बस्तर सीट भाजपा महज 4.3 प्रतिशत के अंतर से हार गई। इसी तरह कुछ राज्यों में और सीटें भाजपा मामूली अंतर से हार गई थी।

राज्यों में भाजपा के लिए सत्ता की राह आसान हो गई

भाजपा के राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदिवासी वर्ग के लिए गारंटी के साथ उनके कल्याण का काम किया है। यही संवेदनशीलता और काम की गारंटी लोकसभा चुनाव में भी जीत की गारंटी बनेगी। पिछले दो-तीन वर्षों में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, भाजपा के अपने परंपरागत वोटों को आदिवासी समुदाय का साथ मिला तो इन राज्यों में भाजपा के लिए सत्ता की राह आसान हो गई।

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