लखनऊ (मानवीय सोच) ईको ग्रीन कंपनी के कूड़ा निस्तारण में फेल होने के बाद नगर निगम ने अब इसके लिए नई कंपनी की तलाश शुरू कर दी है। नगर निगम घरेलू कचरे के निस्तारण की जिम्मेदारी ऐसी कंपनी को देगा जो इससे सीएनजी बनाएगी। इसके लिए उसने देश-विदेश की कंपनियों से ऑफर मांगा है। इस संबंध में नगर निगम ने विज्ञापन भी जारी कर दिया है। तीन महीने के भीतर चयन हो जाएगा।
राजधानी में घर-घर से कूड़ा उठाने व प्लांट में इसके निस्तारण की जिम्मेदारी ईको ग्रीन कंपनी के पास है। कंपनी कूड़े का निस्तारण नहीं कर पा रही है। जिसकी वजह से शिवरी प्लांट में कचरे का पहाड़ खड़ा हो गया है। जिसके चलते नगर निगम ने अब नई कंपनी के चयन की कार्रवाई शुरू कर दी है। नई कंपनी घरेलू कचरे का निस्तारण करेगी। सीएनजी बनाएगी। कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मांगा है।
इस बारे में जानकारी देते हुए नगर आयुक्त, इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि राजधानी में कूड़े से सीएनजी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए कंपनियों से ऑफर मांगे गए हैं। कंपनियों को अपने खर्चे पर पूरा प्लांट व अन्य संसाधन लगाना होगा। नगर निगम इसमें कोई निवेश नहीं करेगा।
300 टन कचरे से बनेगी 20 हजार किलो सीएनजी
– जिस कम्पनी का नगर निगम के साथ करार होगा उस कम्पनी को निगम लगभग 300 टन कचरा रोज देगा। यह कचरा घरेलू होगा। कम्पनी को छंटाई करके कचरा दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी नगर निगम की होगी।
– खराब खाना, सब्जियां, पत्तियां, घास, गोबर आदि से प्लांट में सीएनजी तैयार होगी। 300 टन कचरे से 20 हजार किलो सीएनजी रोज बनेगी।
– कम्पनी इस सीएनजी को बाजार में बेचकर मुनाफा कमा सकेगी।
– नगर निगम के पर्यावरण अभियन्ता संजीव प्रधान ने बताया कि 300 कचरा केवल होटलों व सब्जी मण्डियों से ही मिल जाएगा। गोबर की भी खपत हो जाएगी।
पांच रुपए प्रति किलो सस्ती मिलेगी
नगर निगम को सीएनजी बनाने वाली कम्पनी इसे पांच रुपए प्रति किलो सस्ती देगी। नगर निगम की गाड़ियों को चलाने के लिए सीएनजी बाजार से सस्ती मिलेगी।
केवल जमीन देगा, बाकी खर्च कंपनी का
कूड़ा निरस्तारण के लिए नगर निगम जिस कम्पनी से करार करेगा उसे प्लाण्ट लगाने के लिए केवल जमीन देगा। बाकी सभी संसाधन उसे अपने खुद के बजट से जुटाने होंगे।
