वाराणसी (मानवीय सोच) महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में ऑनलाइन डिग्री और उपाधि के लिए छात्रों को परेशान होना पड़ रहा है। ऑनलाइन भुगतान के बाद भी छात्रों के पास न कोई संदेश आ रहा है और न सही जानकारी मिल रही है। काउंटर पर संपर्क कर रहे हैं तो बताया जा रहा है कि फिर से शुल्क जमा करना होगा। साल भर पहले आवेदन करने वाले छात्रों की फीस रसीद भी सुरक्षित नहीं होने के कारण वह परेशान हैं। वहीं, विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर स्टूडेंट पोर्टल से फीस जमा करने का डाटा भी गायब है।
छात्र गोपाल व अमित ने बताया कि छह फरवरी 2021 को डिग्री के लिए आनॅलाइन आवेदन किया था। गोपाल व अमित ने बताया कि स्टूडेंट पोर्टल पर री प्रिंट रिसिप्ट वाले सेक्शन में रसीद दिखती थी। बताया कि विश्वविद्यालय की एजेंसी बदलने के कारण यह गड़बड़ी हुई है। जब पेमेंट किया गया था तब कोई और एजेंसी का नाम दिखता था। अब दूसरी एजेंसी का नाम नजर आता है। ऐसा लग रहा है कि पुरानी एजेंसी की तरफ से नई एजेंसी को डाटा ट्रांसफर नहीं किया गया है।
परीक्षा नियंत्रक प्रो. बीडी पांडेय ने बताया कि छात्रों को अगर परेशानी हो रही है तो वह परीक्षा विभाग में संपर्क कर सकते हैं। उनकी समस्या का समाधान कराया जाएगा। दीक्षांत समारोह के बाद इस तरह की दिक्कतों को प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा।
केस एक
बीए ऑनर्स मास कॉम के छात्र गोपाल यादव ने डिग्री के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। भुगतान भी ऑनलाइन किया। उस दौरान कोई निर्देश नहीं था कि ऑनलाइन अप्लाई करने के बाद दस्तावेज की हार्ड कॉपी जमा करनी होगी। छात्र के पास जब डिग्री तैयार होने का संदेश नहीं आया तो वह विश्वविद्यालय पहुंचा। बताया गया कि हार्ड कॉपी जमा करनी होगी। स्टूडेंट पोर्टल पर लॉगिन किया तो न तो पाठ्यक्रम नजर आया और न ही फीस की रसीद।
केस दो
बीएससी टेक्सटाइल के छात्र अमित यादव ने डिग्री के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। भुगतान के बाद भी जब डिग्री के लिए कोई संदेश नहीं आया तो छात्र विश्वविद्यालय पहुंचा। एजेंसी के कार्यालय में जानकारी मांगी तो काउंटर पर संपर्क करने को कहा गया। काउंटर पर बताया गया कि फिर से पैसा जमा करिये, रसीद लगाइए और फॉर्म भरकर जमा करिये तभी डिग्री मिलेगी।
