भदोही (मानवीय सोच) सरकारी अनुदान पाने के लिए लोग क्या-क्या जतन नहीं कर रहे। अब भले ही उन्हें दोबारा शादी ही क्यों न करनी पड़े। ऐसा ही मामला ज्ञानपुर, डीघ और अभोली ब्लॉक में सामने आया है। श्रमिक कन्या सामूहिक विवाह के सत्यापन में ऐसे मामले सामने आए हैं। सत्यापन हुआ तो आवेदक पहले से शादीशुदा निकले। उन्हें दो बच्चे भी हैं। अपात्र मानते हुए उनका आवेदन निरस्त कर दिया।
निर्माण श्रमिक की बेटियों की शादी के लिए सरकार श्रमिक कन्या सामूहिक विवाह योजना चला रही है। इस योजना में श्रमिक की बेटी को शादी में 70 हजार रुपये मिलते हैं। 12 फरवरी को मिर्जापुर के गड़ौली धाम में एक हजार से अधिक जोड़ों की शादी होने जा रही है। सोनभद्र, मिर्जापुर और भदोही के निर्माण श्रमिकों की बेटियों की शादी होनी है।
भदोही जिले के छह ब्लॉकों से कुल 186 आवेदन सामूहिक विवाह के लिए आए। श्रम प्रवर्तन अधिकारी जेपी सिंह, मयंक मिश्रा और प्रतिमा मौर्य ने सत्यापन शुरू किया तो 186 में 116 आवेदन अपात्र मिले। सत्यापन में गर्भवती, पहले से शादीशुदा और दो से तीन बच्चों की मां ने भी सामूहिक विवाह में शामिल होने के लिए आवेदन किया था। ऐसे आवेदनों को विभागीय स्तर से निरस्त किया गया।
