बिजली दरें बढ़वाने के लिए अपटेल से गुहार लगाएगा पावर कॉर्पोरेशन

लखनऊ  (मानवीय सोच)  बिजली दरें बढ़वाने के लिए पावर कॉर्पोरेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (अपटेल) में गुहार लगाएगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से 20 जुलाई को वर्ष 2022-23 के लिए जारी टैरिफ ऑर्डर के खिलाफ दिल्ली में मंगलवार को अपटेल में याचिका दायर किए जाने की संभावना है। पावर कॉर्पोरेशन को 11.67 फीसदी लाइन हानियों के आधार पर बिजली दरें तय करने से एतराज है। कॉर्पोरेशन चाहता था कि 17.5 फीसदी लाइन हानियों के आधार पर दरें तय की जाएं, जिससे उसे राजस्व का नुकसान न हो। वहीं टैरिफ आर्डर में विभिन्न मदों में नियामक आयोग द्वारा की गई कटौती को भी पावर कॉर्पोरेशन की ओर से चुनौती दी जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि बिजली कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए बिजली दरें बढ़वाना चाहती थीं, लेकिन आयोग ने इस साल दरों में किसी तरह की वृद्धि नहीं की है। यही वजह है बिजली कंपनियां टैरिफ आर्डर से संतुष्ट नहीं है। याचिका में कम लाइन हानियों के आधार पर बिजली दरें तय किए जाने के अलावा नियामक आयोग द्वारा विलंब अधिभार लगाने, ट्रांसमिशन चार्ज, परिचालन एवं अनुरक्षण व्यय में कटौती, स्मार्ट मीटर पर आने वाले खर्च को मंजूरी न दिए जाने, विभागीय कर्मचारियों को रियायती बिजली की सुविधा खत्म करने, निजी कंपनी टोरेंट पावर को बेची जा रही सस्ती बिजली जैसे मुद्दों को उठाते हुए नियामक आयोग के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध जाएगा।  

बिजली दरें घटाने के लिए पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की मांग 
अपटेल में याचिका दायर किए जाने की भनक लगते ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद हरकत में आ गया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग का टैरिफ आर्डर चार अगस्त से प्रभावी हो गया है। पहले ऊर्जा मंत्री और सरकार इस टैरिफ आर्डर की तारीफ करके वाहवाही लूट रहे थे और अब अपटेल में मुकदमा दायर किया जा रहा है।

वर्मा ने सोमवार को नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह से मुलाकात कर एक जनहित प्रत्यावेदन दाखिल किया। इसमें बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के निकल रहे 22,045 करोड़ और एनपीसीएल पर निकल रहे 579 करोड़ रुपये के एवज में बिजली दरों में कमी के लिए पुनर्विचार याचिका पर तत्काल सुनवाई शुरू करने की मांग की गई है। वहीं उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाया कि बिजली कंपनियां अपटेल में मुकदमा दायर करने के लिए वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। इसका बोझ भी उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। 

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