लखनऊ (मानवीय सोच) बिजली व्यवस्था में सुधार के भले ही लंबे-चौड़े दावे किए जा रहे हों, पर वितरण कंपनियां केंद्र सरकार की कसौटी पर खरी नहीं उतर पा रही हैं। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की ओर से देश भर की सरकारी व निजी बिजली कंपनियों की 2020-21 की 10वीं वार्षिक रेटिंग में प्रदेश की एक भी सरकारी बिजली कंपनी ए प्लस, ए, बी प्लस व बी ग्रेड हासिल नहीं कर पाई हैं।
रेटिंग में सिर्फ निजी कंपनी नोएडा पावर कंपनी लि. (एनपीसीएल) को ही ए प्लस रेटिंग मिली है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम को सी ग्रेड और पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों व केस्को को सी माइनस ग्रेड मिला है। सरकारी बिजली कंपनियां 9वीं वार्षिक रेटिंग के मुकाबले और नीचे खिसक गई हैं।
रेटिंग में प्रदेश की बिजली कंपनियों की आपूर्ति से लेकर वित्तीय एवं प्रबंधकीय परफॉर्मेंस को संतोषजनक नहीं माना गया है। इसका असर केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता के साथ-साथ बिजली कंपनियों द्वारा वित्तीय संस्थाओं से लिए जाने वाले ऋण पर भी पड़ सकता है।
इससे कंपनियों को मिलने वाले ऋण के ब्याज दर में इजाफा हो सकता है। इसका असर भविष्य में उपभोक्ताओं पर बिजली दरों में वृद्धि के रूप में पड़ सकता है। लगातार 10वें साल की रेटिंग में भी यूपी की बिजली कंपनियों का प्रदर्शन दूसरे राज्यों के मुकाबले काफी निराशानजक रहा है।
रेटिंग में गुजरात और हरियाण की कंपनियां शीर्ष पर
बिजली कंपनियों में शीर्ष प्रबंधन की जवाबदेही तय हो : वर्मा
