प्रयागराज: (मानवीय सोच) प्रयागराज के चकिया मोहल्ले में रात के सात बजे का वक्त है। सुनसान सी एक सड़क पर शनिवार की शाम कोई स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही। जाली लगा एक बाड़ा है, जिसमें दो कुत्ते सो रहे। एक पुरानी फिएट गाड़ी इसी जाली से सटी खड़ी है। बगल में एक रास्ता है, जिसके बाईं ओर तालाब बताया जा रहा है और दाईं ओर मलबे में तब्दील एक मकान दिखता है।
3-4 पुरुष पुलिसकर्मी और 2 महिला पुलिसकर्मी इसी मलबे के बीच खाली जमीन पर बैठे हैं। पेड़ पर एक स्ट्रीट लाइट वाली LED बंधी है, लेकिन जल नहीं रही। कुछ अस्थाई खंभों पर भी ऐसी ही LED लगी है। अंधेरे में बैठे पुलिसवाले अपना फोन चलाते वक्त काट रहे। मीडिया वालों की गाड़ी रुकती है, तो कोई पुलिसवाला उसी कुर्सी पर बैठे-बैठे पूछता है। कौन चैनल से हैं सर? पता मिल जाने पर फिर वही मोबाइल सहारा है।
