प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया हर्बल खेती का मंत्र, साझी विरासत है गंगा की पवित्रता

नई दिल्ली  (मानवीय सोच)  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में राष्ट्रीय गंगा परिषद की अध्यक्षता करते हुए कहा कि परिषद की बैठक नमामि गंगे पहल को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने का एक शानदार अवसर है। छोटे शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के नेटवर्क के विस्तार सहित स्वच्छता के प्रयासों को बढ़ाने के तरीकों के बारे में भी बताया।

साझी विरासत है गंगा नदी

प्रधानमंत्री मोदी ने गंगा नदी को एक साझी विरासत बताया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हमें एक अनमोल विरासत दी है और यह हमारी नियति है कि हम इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों को उसी स्थिति में और उसी पवित्रता के साथ सौंपें।

प्रधानमंत्री मोदी ने 30 दिसंबर को कोलकाता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय गंगा परिषद की अध्यक्षता की। परिषद की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने गंगा नदी के किनारे हर्बल खेती को बढ़ावा देने के तरीकों पर जोर देने को कहा।

990 करोड़ लागत की परियोजनाओं का उद्धाटन

बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नमामि गंगे और पेयजल-स्वच्छता परियोजनाएं की आधारशिला रखी। इसके अतिरिक्त उन्होंने 990 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 7 सीवरेज विकास परियोजनाओं का उद्धाटन किया।

इन परियोजनाओं से नबद्वीप, कछरापरा, हालीशर, बज-बज, बैरकपुर, चंदन नगर, बांसबेरिया, उत्तरपारा कोट्रंग, बैद्यबती, भद्रेश्वर, नैहाटी, गरूलिया, टीटागढ़ और पानीहाटी की नगर पालिकाओं को लाभ होगा। ये परियोजनाएं पश्चिम बंगाल राज्य में 200 एमएलडी से अधिक की सीवेज ट्रीटमेंट कैपेसिटी को बढ़ाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के तहत 1,585 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित होने वाली 5 सीवरेज बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी।

इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल में 190 एमएलडी नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता जुड़ जाएगी। इन परियोजनाओं से उत्तरी बैरकपुर, हुगली-चिनसुरा, कोलकाता केएमसी क्षेत्र गार्डन रीच और आदि गंगा और महेस्तला शहर के क्षेत्रों को लाभ होगा।

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