अपराध करने के बाद जेल की अंधेरी कोठरी में इन बंदियो और कैदियों के जीवन में भले ही जेल की चारदीवारी के बाहर की रोशनी नसीब न हो। लेकिन इनके हाथों का हुनर लोगों के घरों को रोशन कर रहा है। जिला जेल में कौशल विकास की ओर से अब तक कई दर्जन बंदियों को LED बल्ब बनाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका था। अब इन बंदियों ने LED बल्ब बनाने में महारथ हासिल की है। लखनऊ जेल में बने शोरूम में रामपुर जेल के बंदियों द्वारा बनाए गए एलईडी बल्ब भी रखे गए थे। तब से कई कंपनी ने बंदियों के काम को देखकर उन्हें बल्ब बनाने का आर्डर दिया है। रामपुर की जिला जेल के कैदियों की जीवनशैली अलग है, दिशा में बदलने के लिए उन्हें विभिन्न कौशल सिखाए जा रहे है। यहां कैदी और बंदी जेल से छुटने के बाद खुद का रोजगार कर सकें। इसके लिए रामपुर जेल में कैदी और बंदी प्रशिक्षण प्राप्त कर कौशल विकास कार्यक्रम के तहत एलईडी बल्ब बना रहे है।
स्किल सीखने के बाद बाहर की दुनियां में रोजगार पाकर अपना और अपने परिवार के भरण पोषण कर सकेंगे। जेल अधीक्षक प्रशांत मौर्य ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के निर्देशन में जिला कारागार में बंदी/कैदी को कौशल विकास मिशन के तहत कई विषयों में व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया गया। जेल अधीक्षक के मुताबिक इसका उद्देश्य है कि जो बंदी या कैदी में किसी तरह की स्किल अगर उनके अंदर नही है और वे उम्र के उस पड़ाव पर है कि जेल से बाहर जाने के बाद कुछ सीखना थोड़ा मुमकिन नहीं होगा। इसलिए जेल के अंदर खाली समय का सदूपयोग होगा। दूसरा उद्देश्य है कि जेल से स्किल सीखने के बाद बाहर की दुनियां में उन्हें रोजगार मिल सकेगा और अपने जीवन यापन के लिए धन का अर्जन कर सकेंगे।
