स्थायी डीजीपी के पैनल के लिए अगले हफ्ते भेजा जाएगा प्रस्ताव

लखनऊ (मानवीय सोच)  उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। साढ़े तीन माह से खाली पड़े इस पद को भरने के लिए डीजीपी मुख्यालय अर्ह अधिकारियों का ब्योरा तैयार कर रहा है। इसके लिए अगले हफ्ते केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा और डीजीपी के लिए पैनल की मांग की जाएगी।

स्थायी डीजीपी को लेकर पुलिस महकमे में अलग-अलग तरह की चर्चा है। कुछ अफसर कह रहे हैं कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) अगर रिक्त तिथि के अनुसार निर्णय लेता है तो उसमें मौजूदा डीजीपी का नाम आ पाना मुश्किल होगा। क्योंकि डीजीपी मुकुल गोयल को 11 मई को हटाया गया था। 

11 मई को वरिष्ठता के क्रम में गोयल के अलावा डीजी प्रशिक्षण आरपी सिंह और डीजी कोऑपरेटिव सेल जीएल मीना का नाम सबसे ऊपर होगा। वहीं, अगर जिस तिथि से पैनल की मांग की जाएगी उसके अनुसार निर्णय लिया गया तो आरपी सिंह और जीएल मीना के नाम बाहर हो जाएंगे। क्योंकि इनके रिटायर होने में 6 माह से कम का समय बचा है। ऐसी स्थिति में गोयल के बाद भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष राज कुमार विश्वकर्मा और कार्यवाहक डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान का नाम पैनल में शामिल कर प्रदेश सरकार को भेज दिया जाएगा।

डीजीपी चयन की प्रक्रिया
डीजीपी बनने के लिए अफसर को 30 वर्ष की सेवा अवधि पूरी करना जरूरी है। इसके अलावा वरिष्ठता के क्रम में एक-एक अफसर का रिकॉर्ड चेक किया जाता है। देखा जाता है कि क्या संबंधित अधिकारी ने कोई अपराध किया है, अगर किया है तो किस वर्ष में? उसे आरोप पत्र कब दिया गया। क्या जुर्माना लगाया गया? क्या जुर्माने के खिलाफ उसने कहीं अपील दायर की है? अपील की है तो क्या उसमें स्टे मिला है? यह सब जानकारी आयोग को भेजी जाती है। इसके बाद आयोग बैठक के लिए तारीख तय करता है और निर्णय लिया जाता है। फिर वरिष्ठता व रिकॉर्ड के अनुसार पहले तीन नाम का चयन कर राज्य को भेज दिया जाता है।

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