राहुल गांधी ने की राष्ट्रगान की घोषणा…सब सावधान हुए तो कुछ और बजने लगा

मुुंबई: (मानवीय सोच)  राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार गलत कारणों से. महाराष्ट्र में बुधवार को एक स्टॉप के दौरान राष्ट्रगान के बजाय कुछ मिनट के लिए गलत गाना बजाए जाने के एक वायरल वीडियो ने विवाद खड़ा कर दिया है. भाजपा ने इस गलती के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा है. घटना का एक वीडियो साझा करते हुए, महाराष्ट्र भाजपा नेता नितेश राणे ने ट्वीट किया: ‘पप्पू का कॉमेडी सर्कस.’ तमिलनाडु के भाजपा नेता अमर प्रसाद रेड्डी ने भी वही वीडियो साझा किया और लिखा, ‘राहुल गांधी, यह क्या है?’ यात्रा के लाइव प्रसारण से पुष्टि होती है कि यह घटना महाराष्ट्र के वाशिम जिले में हुई, जब राहुल गांधी ने अपना भाषण समाप्त किया उसके तुरंत बाद.

राष्ट्रगान के लिए एक उद्घोषणा की गई, जिसे राहुल गांधी ने भी माइक्रोफोन पर दोहराया. जैसे ही मंच पर मौजूद नेताओं ने अपनी जगह ली, राष्ट्रगान की कुछ सेकंड के लिए दूसरा संगीत बजने लगा. राहुल गांधी ने मंच से नीचे नेताओं को इशारा किया, तो संगीत बंद हुआ. बाद में ‘जन गण मन’ बजाया गया. इस घटना ने कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की आलोचना को भी आमंत्रित किया, जिन्होंने इस गलती को समझने में मंच पर मौजूद कांग्रेस नेताओं की ओर से लंबा समय लेने पर अविश्वास व्यक्त किया. कांग्रेस ने अब तक इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. कांग्रेस की एक जनसंपर्क पहल ‘भारत जोड़ो यात्रा’ ने 7 नवंबर को नांदेड़ जिले से महाराष्ट्र में प्रवेश किया था. नांदेड़ के अलावा, इसने अब तक राज्य के हिंगोली और वाशिम जिलों को कवर किया है.

पैदल मार्च 20 नवंबर को मध्य प्रदेश जाने से पहले महाराष्ट्र के अकोला और बुलढाणा जिलों को कवर करेगा. महा विकास अघाड़ी (एमवीए) में कांग्रेस की सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना के नेताओं ने महाराष्ट्रमें इस यात्रा में भाग लिया. राहुल गांधी ने बुधवार को यात्रा के दौरान केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनकी नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है और किसानों की कमर तोड़ दी है. उन्होंने कहा कि बड़े औद्योगिक घराने नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापार उद्यम बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करते हैं. लेकिन वे केंद्र की 2016 की नोटबंदी की कवायद और 2017 में जिस तरह से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू किया गया था, उसका खामियाजा भुगत रहे हैं.

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