ब्राह्मण-वैश्य वोटरों को साधने की रणनीति

(मानवीय सोच) भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश में नगर निगम महापौर चुनाव में अपने परंपरागत ब्राह्मण और वैश्य वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। पार्टी ने 17 में से पांच नगर निगम में ब्राह्मण और पांच में वैश्य समाज के कार्यकर्ता को महापौर प्रत्याशी बनाया हैं। पार्टी ने पिछड़े व दलित वोट बैंक को प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश की है।

सामान्य वर्ग में ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य और कायस्थ समाज को भाजपा का सबसे पुराना परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में मिशन 80 का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पार्टी ने निकाय चुनाव से ही अपने परंपरागत वोट बैंक के साथ पिछड़े व दलित वर्ग में भी अपने बड़े वोट बैंक को संतुष्ट करने की रणनीति अपनाई है।

रविवार रात घोषित दूसरे चरण के 7 नगर निगम के महापौर प्रत्याशी में पार्टी ने तीन ब्राह्मण, दो वैश्य, एक कलाल, एक कुर्मी और एक कलाल समाज के कार्यकर्ता को टिकट दिया है।

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