दिल्ली में पुराने वाहनों की उम्र अब फिटनेस के आधार पर तय होगी, नंद नगरी में ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर का शिलान्यास
दिल्ली सरकार राजधानी में पुराने वाहनों की उम्र तय करने के लिए नया मापदंड अपनाने की दिशा में बढ़ रही है। सरकार अब वाहनों की उम्र फिटनेस के आधार पर तय करने की योजना बना रही है। इसी क्रम में नंद नगरी में एक नए ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर (ATS) का शिलान्यास किया जा रहा है, जहां सालाना 72,000 वाहनों की फिटनेस जांच की जा सकेगी।
इस पहल के तहत दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि अगले साल तक राजधानी में 9 ऐसे सेंटर स्थापित किए जाएं। फिलहाल राजधानी में झुलझ़ुली में एकमात्र ऑटोमेटेड सेंटर कार्यरत है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी शिलान्यास

सरकार द्वारा प्रस्तावित इस फिटनेस सेंटर का शिलान्यास मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी। यह सेंटर डीटीसी द्वारा विकसित और संचालित किया जाएगा। दिसंबर 2025 तक इसके पूरी तरह चालू हो जाने की संभावना है।
सभी प्रकार के वाहनों की जांच होगी
नंद नगरी स्थित इस सेंटर में बड़े और छोटे सभी प्रकार के वाहनों की जांच हो सकेगी। यह पूरी तरह ऑटोमेटेड होगा, जिससे मानवीय हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
दिल्ली में कुल 9 ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर
झुलझ़ुली: पहले से चालू
नंद नगरी: निर्माणाधीन
बुराड़ी: 5 लेन का प्रस्तावित सेंटर
तेहखंड: 4 लाइन का प्रस्तावित सेंटर
5 अन्य सेंटर: DTC के विभिन्न डिपो में स्थापित होंगे
6 नए स्थान: इस माह के अंत तक तय होंगे, सभी दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में होंगे
इस व्यवस्था का उद्देश्य है कि लोगों को अपने ही इलाके में फिटनेस जांच की सुविधा मिले।
अब तक 61 लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण रद्द
दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने अब तक 61,14,728 वाहनों का पंजीकरण रद्द किया है, यह कहकर कि ये वाहन अपनी तय उम्र पूरी कर चुके हैं। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में डीजल वाहनों की उम्र 10 साल और पेट्रोल वाहनों की 15 साल निर्धारित है।
सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी दलील
सरकार की योजना है कि वह सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दे सके कि दिल्ली में फिटनेस के आधार पर वाहनों के चलने की अनुमति दी जाए, जैसा कि देश के कई अन्य राज्यों में हो रहा है। इसके लिए जरूरी है कि पहले राज्य में पर्याप्त और आधुनिक फिटनेस जांच व्यवस्था हो।
विशेषज्ञों की सिफारिश का समर्थन
दिल्ली सरकार अब उन विशेषज्ञों की सिफारिश का समर्थन कर रही है, जो कहते हैं कि वाहन की उम्र नहीं, फिटनेस तय करे उसके चलने की अनुमति। इससे पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ वाहन मालिकों को भी राहत मिलेगी।
निष्कर्ष:
दिल्ली सरकार की यह पहल केवल पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रौद्योगिकी आधारित ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट की दिशा में बड़ा कदम भी है। यदि सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली देश का पहला ऐसा महानगर बन सकता है, जहां वाहनों की वैधता उम्र नहीं बल्कि फिटनेस से तय होगी
