लखनऊ (मानवीय सोच) लेवाना सूईट होटल अग्निकांड चार की मौत के बाद सरकार जागी है। अग्निकांड के बाद कमिश्नर ने एलडीए को चिट्ठी लिखी है। इसमें पूछा गया है कि मई में सीलिंग, अगस्त में ध्वस्तीकरण का आदेश फिर भी होटल कैसे चल रहे थे। एलडीए को लखनऊ के होटलों की कुंडली खंगालने का आदेश दिया गया है। कहा गया है कि गड़बड़ी मिलने पर सील की कार्रवाई की जाए।
दरअसल, लखनऊ के हजरतगंज में मदनमोहन मालवीय मार्ग पर स्थित होटल लेवाना सुइटस में सोमवार सुबह भीषण आग लग गई। दूसरी और तीसरी मंजिल पर कमरों में फंसे चार लोगों की दम घुंटने से मौत हो गई। होटल में फंसे 15 लोगों को बेसुध हालत में बाहर निकाला गया। प्राथमिक उपचार के बाद आठ को छुट्टी दे दी गई तथा सात को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिविल अस्पताल पहुंच पर घायलों का हाल लिया। शासन ने कमिश्नर रोशन जैकब और पुलिस कमिश्नर एसबी शिरडकर के नेतृत्व में उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। पुलिस ने होटल मालिक सुमेर अग्रवाल और उनके बेटों रोहित व राहुल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
होटल लेवाना सुइट्स के 30 कमरों में से 18 बुक थे जिनमें 36 लोग ठहरे हुये थे। सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे दूसरी मंजिल पर धुआं उठना शुरू हुआ। कुछ देर में ही आग की लपटें निकलने लगी। गलियारा धुआं से भर गया। चीख पुकार के बीच लोग कमरों से निकल कर बाहर भागे। बिजली गुल हो जाने से सब तरफ घुप्प अंधेरा हो गया था। होटल में रुके उज्ज्वल ने बताया कि वह लोग किसी तरह बाहर आ गये थे। होटल के कर्मचारियों के पास कोई ऐसी सुविधा नहीं थी जिससे वह शीशे तोड़ सके।
अग्निशमन सुरक्षा के उपकरण भी कोई नहीं चला पा रहा था। अग्निशमन सुरक्षा के जवान जब होटल के अंदर घुसे तो दूसरी मंजिल पर गैलरी के पास दो शव मिले थे। आशंका जतायी गई कि ये लोग किसी तरह कमरे से बाहर निकले लेकिन धुआं भरा होने की वजह से दम घुटने से इनकी मौत हो गई। तीसरी मंजिल पर कमरा नम्बर 308 की खिड़की तोड़ी गई तो दो लोग अंदर मृत मिले थे।
