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यूपी के इस कद्दावर ब्‍यूरोक्रेट को धमकी देने वाला उनका ही IT कंसल्‍टेंट निकला

लखनऊ: (मानवीय सोच)   उत्‍तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति) अनुराग श्रीवास्तव का डेटा हैक करने का मास्टर माइंड कोई और नहीं बल्कि उनका करीबी ही निकला। साइबर सेल के हत्थे चढ़ा सत्य प्रकाश प्रमुख सचिव का विश्‍वासपात्र होने के साथ ही जल जीवन मिशन का आईटी कंसल्टेंट भी था। इसीलिए उसने मौका पाकर उनके कार्यालय में वेबसाइट की मरम्मत करने वालों के जरिए उनका ई-मेल और अन्य डेटा हैक कर लिया था। उसके बाद ई-मेल के जरिए धमकी देकर पांच बिट क्वाइन (80 लाख रुपये) मांगे थे। बताया जा रहा है कि इस काम में सत्‍य प्रकाश ने अपने नाबालिग बेटे की मदद भी ली थी। पुलिस उससे भी पूछताछ कर रही है।

आईटी विशेषज्ञ सत्‍य प्रकाश ने बेहद शातिराना तरीके से पूरी साजिश रची। सत्‍य प्रकाश के कंप्‍यूटर से पुलिस को कई अहम साक्ष्‍य मिले। उसके बेटे को किशोर न्‍यायालय में पेश कर बाल सुधार गृह भेज दिया गया। पूछताछ में सामने आया कि सत्‍य प्रकाश ने वेबसाइट से हावर्ड नेट डॉट इन नाम से डोमेन खरीदा। धमकी वाले मेल में भेजे गए डॉक्‍यूमेंट की जांच हुई तो पता चला कि इसे सत्‍य प्रकाश के नाबालिग बेटे ने बनाया था।

प्रमुख सचिव से बढ़ाई नजदीकियां

पुलिस से पूछताछ के दौरान सत्‍य प्रकाश ने कई अहम खुलासे किए। उसने कहा कि उसे लगा था कि प्रमुख सचिव इतनी छोटी रकम के लिए केस नहीं दर्ज कराएंगे। साइबर क्राइम थाने के प्रभारी निरीक्षक मो. मुस्लिम खान ने बताया कि मूलरूप से पटना निवासी सत्‍य प्रकाश लखनऊ में शहीद पथ पर पार्थ अपार्टमेंट में परिवार सहित रहता है। पहले उसने प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्‍तव से नजदीकियां बढ़ाई। धीरे धीरे वह उनका विश्‍वासपात्र बन गया। सत्‍य प्रकाश उनके निजी और दफ्तर में इंटरनेट से जुड़ी समस्‍या दूर करने लगा। फिर प्रमुख सचिव की गोपनीय जानकारियां हासिल कर उनका मेल और डाटा हैक क‍र लिया।

तीन आरोपितों को पहले ही पकड़ चुकी है पुलिस

साइबर सेल की टीम इससे पहले पीजीआई के उतरेठिया बाजार निवासी अमित प्रताप सिंह, वृंदावन योजना सेक्टर-9 निवासी रजनीश निगम और गोमतीनगर एम रसेल कोर्ट निवासी हार्दिक खन्ना को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। आरोपियों के पास से तीन मोबाइल व एक लैपटॉप बरामद हुआ था। आरोपितों ने टेंडर पर मिले सरकारी वेबसाइट से संबंधित काम करने के दौरान प्रमुख सचिव के ई-मेल से निजी जानकारी जुटाई थी। जिसमें सत्य प्रकाश ने भी उनकी मदद की थी। जालसाजों ने ई-मेल के क्लाउड पर इकट्ठा डेटा चोरी कर लिया था। उसके बाद उन्हें मेल भेजकर उनके क्रेडिट कार्ड से विदेशी मुद्रा में लेनदेन किया। इसके बाद गूगल ड्राइव से चुराए डेटा व फोटो को बदलकर धमकी भरे मेल भेजे थे। इसके बदले में पांच बिटक्वॉइन भारतीय मुद्रा में करीब 80 लाख रुपये एक वॉलेट में भेजने को कहा था। उसी के बाद साइबर सेल ने केस दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू की थी।

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