संयुक्त राष्ट्र ने भी यह बात मान ली है कि “ग्लोबल साउथ” के देशों को भारत के दृष्टिकोण पर भरोसा। वह पीएम मोदी की बातों पर विश्वास करते हैं। यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को “ग्लोबल साउथ” की आवाज के तौर पर पेश किया है। संयुक्त राष्ट्र के इस बयान के बाद अब साफ हो गया है कि भारत इसमें पूरी तरह सफल रहा है। संयुक्त राष्ट्र की राजदूत ने कहा है कि बहुपक्षीय भागीदारी के प्रति भारत का दृष्टिकोण परस्पर सम्मान और एकजुटता पर आधारित है और बेहतर भविष्य को आकार देने में योगदान देने के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ ‘‘भारत के इसी दृष्टिकोण’’ पर भरोसा करता है।
संयुक्त राष्ट्र में सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस की स्थायी प्रतिनिधि इंगा रोंडा किंग ने कहा, ‘‘आज ‘ग्लोबल साउथ’ में महत्वपूर्ण नेताओं में से एक आपका बेहतरीन देश भारत है।’’ ‘सेंटर फॉर ग्लोबल इंडिया इनसाइट्स’ (सीजीआईआई) और ‘इंडिया राइट्स नेटवर्क’ की ओर से ‘भविष्य का संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन: भारत और विश्व के लिए इसके क्या मायने हैं’, विषय पर आयोजित ‘ऑनलाइन’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए किंग ने कहा कि बहुपक्षीय जुड़ाव के प्रति भारत का दृष्टिकोण आपसी सम्मान और एकजुटता पर आधारित है। कैरेबियाई देश की संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने कहा, ‘‘आज, ‘ग्लोबल साउथ’ भविष्य को आकार देने में योगदान देने के लिए भारत के दृष्टिकोण पर भरोसा करता है।’’
यह वेबिनार ऐसे समय में आयोजित किया गया है, जब विश्व के नेता 22 व 23 सितंबर को आयोजित होने वाले ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एकत्रित होने वाले हैं, जिसके बाद वार्षिक महासभा उच्च स्तरीय सप्ताह का आयोजन होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 21 सितंबर को विलमिंगटन, डेलवेयर में राष्ट्रपति जो.बाइडेन द्वारा आयोजित ‘क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन’ में शामिल होंगे और 22 सितंबर को लॉन्ग आइलैंड में एक विशाल सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र के शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस लिहाज से ये दोनों कार्यक्रम भारत के लिए बेहद अहम हैं।
