मेरठ (मानवीय सोच) गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर मेरठ से बदायूं तक काम ने रफ्तार पकड़ ली है. मेरठ से प्रयागराज तक बनाए जा रहे 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का कार्य गति पकड़ रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि कुंभ से पहले एक्सप्रेसवे को शुरू कर दिया जाए. पहले चरण में सबसे अधिक काम किया गया है. बीते दिनों बारिश के कारण जमीन समतलीकरण में बाधा आई, लेकिन अब कार्य की रफ्तार बढ़ रही है. चार चरणों में बनाए जा रहे 594 किमी मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेसवे के पहले चरण का कार्य अभी तक सबसे अधिक किया गया है.
प्रयागराज कुम्भ से पहले गंगा एक्सप्रेसवे का तोहफा देने के लिए युद्धस्तर पर कार्य शुरु हो गया है. मेरठ स्थित बिजौली गांव से शुरू होने वाले एक्सप्रेसवे में समतलीकरण का कार्य रफ्तार के साथ चल रहा है. पहले चरण का कार्य आईआरबी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दिया गया है. रोजाना की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को औद्योगिक विकास विभाग भेज रहा है. जिससे कार्य की गति पर रोजाना निगरानी की जा सके. सरकार का लक्ष्य है कि कुंभ से पहले एक्सप्रेसवे को शुरू कर दिया जाए. न्यूज़ 18 की टीम मेरठ ज़िला मुख्यालय से तकरीबन बीस किलोमीटर दूर बिजौली में जब गंगाएक्सप्रेस वे के निर्माण कार्य का जायज़ा लिया तो यहां हमें संबंधित कम्पनी के लोग अपने अपने कार्य को अंजाम देते दिखे. गंगाएक्सप्रेस वे के निर्माण कार्य में लगे बुनियाद के पत्थर यानि मज़दूर पूरी मेहनत के साथ अपना सौ प्रतिशत देते नज़र आए.
पहले चरण में हुआ सबसे अधिक काम
गंगा एक्सप्रेसवे की अब तक की रिपोर्ट में पहले चरण में सबसे अधिक काम किया गया है. पहले चरण में 129.700 किमी में से 101.500 किमी का कार्य पूरा हो गया है. दूसरे चरण में 151.700 किमी में से 107.665 किमी का कार्य पूरा हो गया है. तीसरे चरण में 155.700 किमी में से 89.670 किमी कार्य पूरा है. सबसे कम चौथे चरण में 156.847 किमी में से सिर्फ 85.498 मिट्टी समतलीकरण कार्य ही हुआ है.
12 जिलों से जोकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक यूपी के 12 जिलों से होकर गुजरेगा. यह एक्सप्रेसवे मेरठ-बुलंदशहर मार्ग (एनएच-334) पर मेरठ के बिजौली ग्राम से शुरू होकर प्रयागराज बाइपास (एनएच 19) पर जुडापुर दांदू ग्राम के पास समाप्त होगा. इस एक्सप्रेसवे से मेरठ और प्रयागराज के बीच की दूरी भी घट जाएगी. 11 घंटे से ज्यादा का सफर इसके जरिए सात घंटे में पूरा होगा. साथ ही व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को भी बढ़ाएगा. गंगा एक्सप्रेसवे 12 जिलों- मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से गुजरते हुए एक्सप्रेसवे राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ेगा. गंगा एक्सप्रेस वे के लिए अपनी ज़मीन देने वाले किसानों के चेहरे पर भी मुस्कान है. ज़मीन का अच्छा मुआवज़ा मिलने से किसान ख़ुश हैं. वहीं इलाके के लोग योगी सरकार को धन्यवाद दे रहे हैं.
दिसंबर 2024 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
यूपीईडा की लेटेस्ट वर्क प्रोग्रेस रिपोर्ट के मुताबिक कुल 594 किलोमीटर एक्सप्रेसवे में से 490.48 किलोमीटर पर क्लीयरिंग और ग्रबिंग का काम हो चुका है. छह लेन वाली गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना को काम में तेजी लाने के लिए चार समूहों में विभाजित किया गया है और हर समूह में तीन पैकेज शामिल हैं. वहीं मेरठ के ज़िलाधिकारी दीपक मीणा का कहना है कि गंगा एक्सप्रेस के लिए ज़मीन अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है. स्ट्रक्चर पर वर्क कंपनी ने कार्य शुरु कर दिया गया है. एलएंडटी इस कार्य को कर रही है. मेरठ के नौ गांव गंगा एक्सप्रेसवे के अंतर्गत आ रहे हैं. गंगा एक्सप्रेसवे में मेरठ का 17 किमी क्षेत्र आएगा. उन्होंने कहा कि 2024 दिसम्बर तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है.
