नोएडा (मानवीय सोच) सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट सोसाइटी में ट्विन टावर ढहने के बाद खाली हुई जमीन पर निर्माण को लेकर बिल्डर और आरडल्ब्यूए आमने-सामने आ गए हैं। यहां पर किसी भी तरह का आवासीय टावर बनाने का आरडब्ल्यूए विरोध करेगी। इस जमीन पर सिर्फ पार्क, बच्चों के खेलने के लिए मैदान और मंदिर बनाने को लेकर सहमति देंगे। अगर बिल्डर ने यहां अवैध रूप से निर्माण करने की कोशिश की तो फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
बिल्डर दावा करेगा शुक्रवार को सुपरटेक बिल्डर की ओर से कहा गया था कि ट्विन टावर ध्वस्त होने के बाद जो जमीन खाली हुई है उस पर एक आवास परियोजना विकसित करने की सोच रहा है। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण के समक्ष योजना का प्रस्ताव पेश किया जाएगा। बिल्डर ने कहा कि यदि संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मंजूरी नहीं दी तो वह भूमि की लागत और अन्य खर्चों को लेकर दावा करेंगे।
इस कदम का विरोध करेंगे इस पर एमरॉल्ड कोर्ट की आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष उदयभान सिंह तेवतिया ने कहा कि बिल्डर के इस कदम का हर जगह विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस जगह बिल्डर ने अवैध रूप से ट्विन टावर खड़े किए थे वह हरित क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया गया था। अब मलबा हटने पर तीन महीने के बाद यहां पर एक पार्क बनवाया जाएगा। इसके अलावा बच्चों के खेलने के लिए मैदान व मंदिर भी यहां बने, यह सोसाइटी के लोग भी चाहते हैं। आरडब्लयूए के पूर्व अध्यक्ष राजेश राणा ने कहा कि अगर बिल्डर गलत करने का प्रयास करेगा तो वह न्यायालय के फैसले को चुनौती देना जैसा होगा।
मलबे के छोटे हिस्से करने पर आपत्ति
सेक्टर-93ए की छह से अधिक सोसाइटी के निवासी मलबे का मौके पर ही छोटे-छोटे हिस्से करने पर आपत्ति जता रहे हैं। लोगों की मांग है कि मलबे के बड़े हिस्से को ही सेक्टर से लेकर जाया जाए। इसके बाद आबादी से दूर मलबे के छोटे-छोटे हिस्से किए जाएं ताकि लोगों को प्रदूषण से बचाया जा सके।
मलबे की बैरिकेडिंग शुरू, 10 दिन में पूरी होगी
मलबे की बैरिकेडिंग का काम शनिवार से शुरू हो गया। इससे मलबा नहीं फैल सकेगा और धूल कम उड़ेगी। सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट सोसाइटी की ओर से शुरुआत की गई है। यहां टीन शेड और उसके पीछे लोहे के पाइपों का ढांचा तैयार किया जा रहा है। एडीफाइस एजेंसी के परियोजना निदेशक मयूर मेहता ने बताया कि बैरिकेडिंग का काम दस दिन में पूरा कर लिया जाएगा।
खाली भूमि पर ग्रीन बेल्ट विकसित होगी
सुपरटेक ट्विन टावर के पास करीब सात हजार वर्ग मीटर जमीन नोएडा प्राधिकरण की है। इस जमीन को ग्रीन बेल्ट के रूप में प्राधिकरण विकसित करेगा। इसको ठीक ढंग से विकसित करने का काम तीन महीने बाद शुरू होगा। खास बात यह है कि यहां पर उसकी जमीन भी है, इसकी जानकारी नोएडा प्राधिकरण को नहीं थी।
