वाराणसी में घाटों का संपर्क टूटा, विश्वनाथ कॉरिडोर की सीढि़यों तक पहुंचा पानी

वाराणसी : (मानवीय सोच)  19 दिन बाद एक बार फिर गंगा में तेज बढ़ाव होने लगा है। सीजन में तीसरी बात गंगा के जलस्तर में बढ़ाव हो रहा है। पानी बढ़ने से घाटों का आपसी संपर्क एक बार फिर टूट चुका है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की सीढ़ियों तक पानी पहुंच चुका है। जलस्तर सोमवार की सुबह पांच सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। इससे घाट किनारे रहने वालों में खलबली मची है। सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 65.2 मीटर तक पहुंच गया था। हालांकि यह चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से करीब पांच मीटर अभी नीचे हैं। 

इससे पहले शनिवार से रविवार तक गंगा में आठ सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ाव हुआ। रविवार को सुबह 8 से रात 8 बजे तक 73 सेमी पानी बढ़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा की सहायक नदियों चंबल, यमुना और घाघरा में उफान के कारण गंगा में बढ़ाव हो रहा है। फाफामऊ से प्रयागराज, मिर्जापुर और बनारस तक गंगा उफान पर हैं। वाराणसी में सबसे प्रमुख घाट दशाश्वमेध से शीतला घाट का रास्ता भी जलमग्न हो गया है।

लाली घाट और हरिश्चंद्र घाट के बीच भी यही हाल रहा। मणिकर्णिका एवं हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह प्रभावित हो रहा है। पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश के अनसार गंगा में बढ़ाव के मद्देनजर तटवर्ती थाना पुलिस को आमजन को आगाह करने का आदेश दिया गया है। गंगा किनारे पुलिस ने रविवार रात सावधान भी किया।

बाढ़ से अब तक खेती को भारी नुकसान 

वाराणसी में बाढ़ से नुकसान का सर्वे पूरा हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक सदर और राजातालाब तहसीलों में बाढ़ से कुल 4399.568 हेक्टेयर रकबे की फसलों को नुकसान हुआ है। ऐसे में प्रभावित 11592 किसानों को मुआवजा मिलेगा। पिछले महीने आई बाढ़ में सदर और राजातालाब तहसीलों के 99 गांव प्रभावित हुए थे।

जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण की ओर से क्षति का सर्वे हुआ। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) व डीडीएमए प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि 33 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान पर नियमानुसार अधिकतम 13500 रुपया प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाता है।

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