नई दिल्ली (मानवीय सोच) रूस यूक्रेन जंग को देखते हुए जी-20 की चुनौतियां बड़ी हो गई है। इंडोनेशिया के बाद भारत जी-20 की अध्यक्षता करेगा और 2023 में भारत में सदस्य देशों की बैठक होनी है। ऐसे में भारत के समक्ष इसके आयोजन और जी-20 के लक्ष्यों को हासिल करने की चुनौती होगी। यह चुनौती तब कठिन हो जाती है, जब रूस यूक्रेन युद्ध में पूरी दुनिया बंटी हुई है। भारत भी पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद में उलझा हुआ है। ऐसे में भारत इन चुनौतियों से कैसे पार पाएगा। क्या है जी-20 के गठन का लक्ष्य।
अगले साल जी-20 की मेजबानी करेगा भारत
1- 17वां G-20 राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का शिखर सम्मेलन नवंबर 2022 में इंडोनेशिया में होगा। इसके बाद भारत दिसंबर 2022 से G-20 की अध्यक्षता ग्रहण करेगा। भारत एक वर्ष की अवधि के लिए G-20 की अध्यक्षता करेगा। विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि भारत वर्ष 2023 में नई दिल्ली में 20 समूह के नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। भारत ने जी-20 के संस्थापक सदस्य के रूप में दुनिया भर में सबसे कमजोर लोगों को प्रभावित करने वाले महत्त्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के लिए इस मंच का उपयोग किया है। हालांकि, बेरोजगारी में वृद्धि और गरीबी के कारण इसके लिए प्रभावी ढंग से नेतृत्त्व करना मुश्किल है।
2- भारत जी-20 की अध्यक्षता ऐसे समय करेगा, जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तेजी से बदलाव आया है। रूस यूक्रेन जंग और ताइवान मामले में चीन-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के चलते वैश्विक परिदृश्य में काफी बदलाव आया है। रूस यूक्रेन युद्ध में भारत की तटस्थता नीति को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच मतभेद उभर कर आया है। संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ अमेरिका व पश्चिमी देशों द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर मतदान में भारत गैरहाजिर रहा है। भारत की यह रणनीति अमेरिका व पश्चिमी देशों को अखर रही है।
3- भारत के लिए बड़ी चुनौती जी-20 के विचारों एवं लक्ष्यों की रक्षा करने के साथ इंडोनेशिया की सहायता और भू-राजनीतिक मतभेद के कारण इसे विखंडन से बचाने की होगी, जहां एक मंच में एक साथ बैठ कर नेता एक-दूसरे की बात सुनने से कतराते हैं। भारत ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। देश के विभिन्न हिस्सों में जी-20 की सौ बैठकों के लिए आयोजनों की योजना बनाई है। भारत के पड़ोसी देशों के साथ संघर्ष को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में जी-20 शिखर सम्मेलन या मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है।
