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कोरोना में दिल्‍ली के आयुर्वेद अस्‍पताल में जीरो मौत

नई दिल्‍ली  (मानवीय सोच)  कोरोना महामारी ने जहां पूरे विश्‍व में हाहाकार मचा दिया था और लगभग सभी देशों में लाशों का अंबार लग गया था, वहीं भारत में दिल्‍ली का एक अस्‍पताल ऐसा भी था जहां कोरोना की वजह से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई. यहां कोरोना के दौरान हजारों की संख्‍या में मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद भर्ती हुए थे लेकिन आयुर्वेदिक इलाज के बाद सभी को बचा लिया गया और जीरो मौत रिकॉर्ड की गई. यह अस्‍पताल था दिल्‍ली का अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान.

एआईआईए में गुरुवार को पहुंचे कनाडा के इंडोलॉजिस्‍ट जेफ्री आर्मस्ट्रांग ने कोरोना काल में किए गए इस बेहतरीन काम को चमत्‍कार बताया है. उन्‍होंने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्‍सक भारतीय संस्‍कृति के व्‍हाइट ब्‍लड सेल्‍स  यानि श्‍वेत रक्‍त कणिकाएं हैं. भारत ही नहीं बल्कि अब विश्‍व भर फैल चुके आयुर्वेद की क्षमताओं को लेकर भी उन्‍होंने कहा कि यह आयुर्वेद की शक्ति ही थी जिसने कोरोना महामारी में कोरोना से हो रही मौतों के दौरान ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) दिल्‍ली में जीरो मोर्टेलिटी रेट को कायम रखा.

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान का दौरा करते हुए उन्होंने यहां मौजूद उपचार और संसाधनों की तारीफ करते हुए कहा कि ये संस्‍थान विश्व की अमूल्‍य धरोहर है और कोविड में जो भी इसने काम किया वह किसी चमत्कार से कम नहीं है. आयुर्वेद के ये चिकत्सक शरीर में रोग के प्रति रोधक क्षमता बढ़ाने वाले श्वेत रक्त कण हैं.

वहीं इस दौरान संस्थान की निदेशक प्रोफेसर डॉ. तनूजा मनोज नेसरी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि जेफरी अब अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान परिवार का हिस्सा हैं. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान विगत पांच सालों में लगभग 15 लाख मरीजों की सेवा कर चुका हैं और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है.

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