जौनपुर की अटाला मस्जिद को लेकर कानूनी लड़ाई जोरों पर है। हिंदू पक्ष का कहना है कि कन्नौज के राजा विजय चंद्र ने अटला देवी का मंदिर बनवाया था। 14 वीं सदी में फिरोह शाह तुगलक ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवा दी और वहां पूजा पाठ बंद हो गई। इसी मामले को लेकर स्वराज वाहिनी एसोसिएशन ने जौनपुर की सिविल कोर्ट में याचिका दायर की और सिविल कोर्ट ने याचिका को स्वीकार किया और 2 जुलाई को अमीन सर्वे का आदेश दिया। 30 जुलाई को सर्वे की टीम पहुंची जिसका भारी विरोध हुआ।
स्वराज वाहिनी एसोसिएशन और संतोष कुमार मिश्र द्वारा जौनपुर की सिविल कोर्ट में एक वाद दाखिल किया गया और उस वाद में मांग की गई कि विवादित संपत्ति अटाला देवी का मंदिर है। जहां सनातन धर्म के अनुयायियों को पूजा करने का अधिकार है। बताया गया है कि राजा विजय चंद्र द्वारा 13वीं शताब्दी में बनवाया गया यह एक हिंदू मंदिर था, जहां पूजा, सेवा और कीर्तन जैसे अनुष्ठान किए जाते थे।
कोर्ट से कब्जे के लिए प्रार्थना की गई और याचना की गई कि मुकदमे में प्रतिवादियों और अन्य गैर – हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। हिंदू पक्ष ने ये आरोप लगाया है कि 13 वीं शताब्दी में फिरोज तुगलक के भारत पर आक्रमण के बाद उक्त मंदिर को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया गया। इसके खंभों पर मस्जिद का निर्माण किया गया।
वादी आगे तर्क देते हैं कि तुगलक ने हिंदुओं को उस स्थान पर प्रवेश करने से रोका। जो मूल रूप से हिंदू कारीगरों द्वारा पारंपरिक शैली में निर्मित हिंदू मंदिर था। यह भी तर्क दिया गया कि विचाराधीन संरचना कभी मस्जिद नहीं थी बल्कि हिंदू मंदिर था। हिंदू पक्ष का दावा है कि इमारत में हिंदू स्थापत्य शैली से जुड़े प्रमाण आज भी बरकरार हैं जो रीति – रिवाजों को दर्शाते हैं।
हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की याचिका और जौनपुर कोर्ट के आदेश को चैलेंज करते हुए मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया है जैसा कि वादीगण द्वारा दावा किया गया है कि राजा विजय चंद्र ने धालगर टोला में या उस स्थान पर जहां अटाला मस्जिद मौजूद है वहां अटाला देवी को समर्पित किसी मंदिर का निर्माण नहीं कराया और न ही हिंदू धर्म के अनुयायियों ने कभी यहां पहले या फिर वर्तमान में पूजा की है। यह भी तथ्य रखा है कि मस्जिद के स्तंभों पर हिंदू संस्कृति या उनकी निर्माण शैली के संकेत मौजूद नहीं है।
यह भी जानकारी दी गई है कि अटाला मस्जिद की नींव वर्ष 1376 में रखी गई थी और 1408 में इसका निर्माण पूरा हुआ था। वक्फ अताला मस्जिद ने हाल ही में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोनों आदेशों को चुनौती दी। दलील दी कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका केवल गैर-स्थायी आधार पर खारिज कर दी गई। यह देखते हुए कि मामले पर विचार करने की आवश्यकता है, जिस पर सुनवाई करते हुए पीठ ने वादी को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता वक्फ अटाला मस्जिद जौनपुर का मामले में वाद को दोषपूर्ण बताया गया है क्योंकि वादी, सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड सोसाइटी है, जो न्यायिक व्यक्ति नहीं है।
इसलिए प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा दायर करने के लिए सक्षम नहीं है। कोर्ट से याचना की गई है कि इन आधारों पर शिकायत खारिज कर देनी चाहिए। इसके अलावा एक तर्क और दिया गया है कि इस पूरे मामले में वक्फ बोर्ड को शिकायत का पक्ष नहीं बनाया गया। कहा गया कि अदालत ने मुकदमे की संवेदनशील प्रकृति और इसे स्थापित करने के चतुर और शरारती तरीके को देखे बिना यांत्रिक तरीके से आगे बढ़कर इस शरारत को बढ़ावा दिया है।
वादी संतोष कुमार मिश्रा की ओर से प्रार्थना पत्र दिया गया था कि विवादित स्थल के निरीक्षण के लिए अमीन रामस्वरात मिश्रा मौके पर पहुंचे थे। जहां प्रतिवादी मिले और विवादित इमारत के सभी दरवाजे अंदर से बंद कर दिए, जिससे अमीन इमारत के चारों तरफ निरीक्षण करके लौट आए और कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर सुरक्षा बल मांगा। वादी ने कोर्ट से मांग की कि निरीक्षण के लिए अमीन को सुरक्षा बल प्रदान करने के लिए पुलिस अधीक्षक जौनपुर को पत्र लिखकर निर्देशित किया जाए जिससे कोर्ट के आदेश का अनुपालन हो सके। जानकारी के अनुसार इसी दिन सर्वे का प्रारूप तय होना है।
