नई दिल्ली : (मानवीय सोच) इसके लिए मस्क की कंपनी ने पहले व्यक्ति कि खोज शुरू कर दी है, जिसे एक रिक्रूटमेंट प्रोसेस के माध्यम से भर्ती किया जाएगा. इस ट्रायल के दौरान पैरालिसिस पेशेंट पर चिपसेट का ट्रायल शुरू किया जाएगा
इसके लिए ऐसे व्यक्ति कि खोज की जा रही है, जो ‘सर्वाइकल स्पाइनल कोर्ड’ की वजह से पैरालिसिस हो चुके हैं या फिर ‘एमायोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS)’ जैसी बीमारी की चपेट में आ चुके हैं. हालांकि अभी इसकी कोई जानकारी नहीं मिली है कि इस स्टडी में कुल कितने पेशेंट पर ट्रायल शुरू किया जाएगा. इस स्टडी को कंप्लीट करने में करीब 6 साल का समय लगेगा
इस स्टडी में एक रोबोट सर्जरी करके इंसानी दिमाग पर एक ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) को इंप्लांट करेगा. इसकी मदद से वह चिप मूव और इंटेंशन को रिसीव करेगा, उसके बाद आगे कमांड देगा. इसके बाद उस चिपसेट के साथ कंपेटेबल डिवाइस उन कमांड को रिसीव करेंगे और आगे काम करेंगे.
