एकेटीयू में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन कार्यक्रम में एकेटीयू कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि इसरो को 55 साल हो गए हैं। इस दौरान उसे सफलता भी मिली और असफलता भी लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। आज भी इसरो विकसित भारत में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आने वाले समय में बिना हथियारों के युद्ध लड़ा जाएगा। ऐसे में सेटेलाइट की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है कम्युनिकेशन सेटेलाइट को कोलैप्स कर देने पर सब कुछ ठप्प हो जाएगा।
एक वह समय था जब हमारी पहली सेटेलाइट आर्यभट्ट को रूस ने लांच किया था। आज हम 60 देशों के सेटेलाइट लांच कर रहे हैं। इसके माध्यम से हम 75000 करोड़ की आय भी कर रहे हैं। इसरो देश के आर्थिक विकास के भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। आज इस कार्यक्रम को आयोजित किया जा रहा है कल आपके बीच से ही कोई वैज्ञानिक इसरो में जाएगा। इस अवसर पर इसरो इस ट्रैक के निदेशक बीएन रामकृष्ण ने कहा कि चंद्रयान 3 को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार देने की कल ही घोषणा हुई है।
यह हमारे लिए काफी बड़ी उपलब्धि है। मून पर चार पैरों की पूरी लैंडिंग काफी महत्वपूर्ण होती है। पहले चंद्रयान, फिर दो और अभियान के बाद यह सफलता मिली है । हमने इस दौरान आने वाली कमियों को दूर किया। इसलिए असफलता सफलता से ज्यादा बड़ी होती है। हमें असफलता का विश्लेषण करके क्यों असफल रहे, कहां कमियां रह गईं। इसे ध्यान में रखकर आगे बढ़ना है। सफलता जरूर मिलेगी। यह बात सिर्फ विज्ञान नहीं, आपके जीवन, शोध सभी में लागू होती है।
