लखनऊ : (मानवीय सोच) इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के करीब 20 तकनीकी शिक्षा संस्थानों में डीफार्मा कोर्स की संबद्धता न बढ़ाने के उप्र तकनीकी शिक्षा बोर्ड के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इन संस्थानों को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) से कोर्स की मंजूरी मिल चुकी है, ऐसे में इन्हें संबद्धता विस्तार दिया जाए। अगर इन कॉलेजों में कोई कमी हो तो बोर्ड इससे पीसीआई को अवगत कराए।
वहीं, कोर्ट ने कॉलेजों में डीफार्मा कोर्स की सीटें भरने को काउंसिलिंग शुरू करने के बोर्ड के आदेश को भी निरस्त कर दिया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत निर्णय लेकर काउंसिलिंग का कार्यक्रम जारी किया जाए। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह फैसला व आदेश बांदा जिले के बांदा एजुकेशनल इंस्टीट्यूट समेत करीब 20 कॉलेजों की अलग-अलग दायर याचिकाओं पर दिया। इस फैसले से याची तकनीकी कॉलेजों को बड़ी राहत मिली है। याची कॉलेज के वकील अमित कुमार सिंह भदौरिया ने बताया कि याचिकाओं में बोर्ड की समिति के बीते 25 सितंबर के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था की कमियों की वजह से संबद्धता विस्तार नहीं किया जाएगा।
