जिंदा भ्रूण को मृत बता डॉक्टर ने महिला को दी गर्भपात की दवा

नोएडा  (मानवीय सोच)   जिला अस्पताल में एक गर्भवती महिला की अल्ट्रासाउंड जांच में पेट में पल रहे छह सप्ताह के भ्रूण को मृत बता दिया गया, जबकि प्राइवेट अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच में वह जिंदा पाया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टर की लापरवाही पर गर्भवती के परिजनों ने सोमवार को जिला अस्पताल में हंगामा किया। परिजनों ने पुलिस से मामले की शिकायत की है। अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में जांच कमेटी बनाई है।

सदरपुर में रहने वाले राजन मिश्रा पत्नी सोनम को उल्टी-दस्त होने पर रविवार रात जिला अस्पताल लेकर आए थे। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया और दवाएं दीं। पहले से परिवार को गर्भधारण के बारे में जानकारी थी। सोमवार सुबह 10:40 बजे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड किया गया। इसकी रिपोर्ट में भ्रूण को मृत बताया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि जब रिपोर्ट लेकर स्त्री रोग विभाग पहुंचे तो वहां मौजूद डॉक्टर ने रिपोर्ट देखकर कहा कि भ्रूण पेट में मर चुका है। लिहाजा इसके आगे की प्रक्रिया करनी होगी।

मां की ममता ने जान बचाई : डॉक्टर की सलाह पर स्वास्थ्यकर्मी ने सोनम को एक गोली भी खाने के लिए दे दी, लेकिन सोनम का दिल नहीं माना। वह पति से दूसरी जगह दोबारा अल्ट्रासाउंड कराने की जिद पर अड़ गई। दोपहर 12:30 बजे निजी केंद्र पर जाकर अल्ट्रासाउंड कराया, जिसकी रिपोर्ट में भ्रूण स्वस्थ बताया गया और दो सप्ताह बाद दोबारा जांच की सलाह दी गई। भ्रूण की स्थिति और पुख्ता करने के लिए तीसरी जगह भी अल्ट्रासाउंड कराया। यहां भी भ्रूण जीवित बताया गया।

परिजनों ने हंगामा किया

निजी अस्पताल से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद गुस्साए परिजनों ने जिला अस्पताल के लेबर रूम में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने पुलिस को भी बुला लिया। इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय में भी की गई है।

सीएमओ डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने इस मामले में अल्ट्रासाउंड करने वाले सभी डॉक्टरों और स्त्री रोग विशेषज्ञ से पूछताछ की जाएगी। पीड़ित की लिखित शिकायत पर दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी।

पहले भी लगे कई आरोप

● चार साल पहले प्रसव के बाद बेटे के जन्म के बारे में बताया गया, लेकिन बाद में महिला को बेटी दी गई। जिसके बाद परिजनों ने खूब हंगामा किया था। बाद में कागजातों सहित अन्य मेडिकल प्रमाण के बाद ही परिजन माने थे।

● वर्ष 2015 में लड़के को बदलने का आरोप भी अस्पताल की महिला स्वास्थ्यकर्मियों पर लगा था। वहीं स्त्री रोग विभाग में स्वास्थ्यकर्मी और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण बाथरूम, लिफ्ट, अस्पताल कॉरिडोर आदि में प्रसव के मामले सामने आए हैं।

 

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