अयोध्या में जलवानपुरा मुहल्ले के जलभराव से निपटने के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा बनाया गया 35 करोड़ का प्रोजेक्ट सवालों से घिर गया है। बिना सर्वे कराए आनन फानन में बनाए गए इस प्रोजेक्ट को लेकर खुद प्राधिकरण के अधिकारियों को जवाब नहीं सूझ रहा है। मंगलवार को जल निकासी के लिए ट्रायल फेल होने के बाद इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पूरा होने पर भी प्रश्न लगा हुआ है। हाल यह है कि स्थगन आदेश वाली भूमि पर पंप हाउस बनाने का फैसला कर लिया गया जबकि इसकी पूरी जानकारी प्राधिकरण के अधिकारियों के पास थी।
बता दें कि बारिश में भीषण जलभराव को लेकर जलवानपुरा के बाशिंदे परेशानी झेल रहे हैं। बीते दिनों दौरे पर आए मुख्य सचिव ने जब वहां का निरीक्षण कर जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाई तब अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा आनन फानन में 35 करोड़ का एक शानदार प्रोजेक्ट बना मुख्य सचिव को परोस दिया। यहां क्षीरसागर में उस विवादित स्थगन आदेश वाली भूमि पर पंप हाउस बनाने का फैसला किया गया जिसका मामला अदालत में विचाराधीन चल रहा है। लाख टके का सवाल यही है कि जब विवादित भूमि थी तो उसका चयन प्रोजेक्ट के लिए क्यों किया गया और तत्काल ठेका भी दे दिया गया। शासन की नज़र में बेहतर बनने के लिए प्राधिकरण के अफसरों को इतनी जल्दी थी कि प्रोजेक्ट का ले – आऊट तक नहीं तैयार किया गया।
