मुरादाबाद : (मानवीय सोच) 1980 के मुरादाबाद दंगों की रिपोर्ट सामने आने के बाद मुरादाबाद में पुलिस अलर्ट मोड पर है। एहतियाती तौर पर मिश्रित आबादी वाले संवेदनशील स्थानों पर पुलिस का मूवमेंट बढ़ा दिया गया है। भीड़ वाले स्थानों पर खास तौर पर पुलिस की पैनी निगाहें हैं। आयोग की रिपोर्ट के बाद बयानबाजी कर रहे नेताओं और विभिन्न संगठनों पर भी नजर रखी जा रही है।
मुस्लिम लीग ने उठाई खुली अदालत से जांच की मांग
मुस्लिम लीग के राष्ट्रीय सह सचिव कौसर हयात खां ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के इशारे पर आयोग ने झूठी रिपोर्ट तैयार की थी। मुस्लिम लीग ने मांग की है कि खुली अदालत लगाकर 1980 के मुरादाबाद दंगों की जांच की जाए। जांच में सिर्फ 13 अगस्त 1980 की घटनाओं को न रखकर अगस्त 1980 से लेकर दिसंबर 1980 तक मुरादाबाद में हुई सभी घटनाओं को शामिल किया जाए। मुस्लिम लीग का दावा है कि 13 अगस्त 1980 को मुरादाबाद ईदगाह में हुई घटना सांप्रदायिक दंगा नहीं थी बल्कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के इशारे पर मुस्लिमों के खिलाफ पुलिस का इकतरफा एक्शन था। जिसे बाद में सांप्रदायिक दंगे का रंग दिया गया।
