(मानवीय सोच) : चंद्रयान-1 के डेटा की स्टडी कर रहे अमेरिका की हवाई यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स ने दावा किया है कि पृथ्वी के हाई एनर्जी इलेक्ट्रॉन चांद पर पानी बना रहे हैं। ये इलेक्ट्रॉन पृथ्वी की प्लाज्मा शीट में हैं, जो मौसमी प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार है, यानी इनके होने से ही पृथ्वी के मौसम में बदलाव होता है।
इससे पहले 2008 में लॉन्चिंग के बाद चंद्रयान-1 मिशन ने चंद्रमा की सतह पर पानी की मौजूदगी का संकेत दिया था। उस मिशन की एक रिसर्च के आधार पर चांद पर बर्फ होने का दावा किया गया था। इसके बाद साइंटिस्ट्स ने अनुमान लगाया कि चांद के पोलर रीजन में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचने से वहां का तापमान -200 डिग्री सेल्सियस से नीचे हो सकता है, जो बर्फ के फॉर्म में पानी की मौजूदगी की ओर इशारा करता है। इसलिए पानी की खोज के लिए 14 जुलाई 2023 को चंद्रयान-3 लॉन्च किया गया।
