मुंबई (मानवीय सोच) घर का सपना हर किसी का होता और इसके लिए आदमी पाई-पाई जुटाकर उसमें निवेश करता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है जब बिल्डर के चलते या फिर अन्य वित्तीय कारणों की वजह से खरीदारों को समय पर मकान नहीं मिलता। हाल ही में नवी मुंबई से एक ऐसा ही एक मामला देखने को मिला है जहां एक शख्स ने 27 साल पहले फ्लैट बुक किया था और उसे आज तक नहीं मिला। इसके बदले अब राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि शख्स को मुआवजे के रूप में फ्लैट की कीमत के सात गुना के बराबर राशि दी जाए।
दरअसल, यह घटना नवी मुंबई स्थित लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स के दो निवासियों से संबंधित है। इन दोनों ने करीब 27 साल पहले सिटी बिल्डर्स के सिटी एंबेसी प्रोजेक्ट में कुल 1570 वर्ग फुट का फ्लैट बुक कराया था। इन्होंने नवंबर 1995 में 12.56 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया। उन्होंने बताया कि उसी परियोजना में बिल्डर के जरिए एक और फ्लैट बुक किया था, जिसके बदले में भी उन्होंने काफी कीमत चुकाई थी। लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी उनको फ्लैट नहीं मिला।
इस मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के समक्ष कार्यवाही के दौरान सिटी बिल्डर्स के मालिक बिल्डर जसवंत कुमार भाटिया ने 11 मई को आयोग के आदेश पर सहमति व्यक्त की। आदेश में कहा गया है कि दोनों शख्स को 91 लाख रुपये और 88 लाख रुपये दिए जाएं। यह धनराशि बुक की गई कीमत का सात गुना है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि फ्लैट के लिए उन्हें काफी परेशान भी किया गया लेकिन फ्लैट नहीं मिला। आखिरकार 2012 में फ्लैट खरीदारों ने महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का रुख किया और अक्टूबर 2016 में उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए राज्य आयोग ने बिल्डर को चार महीने में सभी तरह से फ्लैटों को पूरा करने और उन्हें शिकायतकर्ताओं को सौंपने का निर्देश दिया। अन्यथा दो महीने में बिल्डर को शेष राशि का भुगतान करने का आदेश दिया गया था।
इसके बावजूद भी बिल्डर ने उनके भुगतान को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और मामले को एनसीडीआरसी के समक्ष अपील में रखा। जिसके बाद इस लंबे चले मामले में यह फैसला सुनाया गया है।
