(मानवीय सोच) मेरा नाम नूरजहां खातून है। दिल्ली के प्रियंका गांधी झुग्गी कैंप CN 6 2B की रहने वाली हूं। आप यो कहें कि रहने वाली थी। आपको पता है न मेरी यह बस्ती दिल्ली के पॉश इलाके वसंत विहार के बीच थी।
उस दिन हम लोग सोकर भी नहीं उठे थे जब वो बुलडोजर लेकर आए। मैं जागी तो देखा कि हमारी झुग्गी घेर ली गई थी। वो चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे कि ये जगह खाली करो। बहुत सारे एनडीआरएफ यानी नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स वाले थे, पुलिस वाले भी थे।
मेरा छह लोगों का परिवार है। हम चार भाई-बहन और मम्मी-पापा। मम्मी- पापा रोजाना सुबह जाकर मुनिरका चौराहे पर खड़े रहते हैं। मजूदरी का काम ढूंढने के लिए। जिन्हें मजदूरों की जरूरत होती है, वो उन्हें वहां से अपने साथ ले जाते हैं। जिस दिन काम मिल गया तो समझ लो हमारे अच्छे दिन है। घर में ठीक से खाना बनेगा। अगर काम नहीं मिला तो समझ लो जो घर में है, वही खाकर रहना होगा।
