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भारत को जल्द मिलेगी S-400 मिसाइल की दूसरी खेप

(मानवीय सोच) रूस पर प्रतिबंधों और रूस से किए गए रक्षा सौदों के लटकने की आशंकाओं के बावजूद S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की दूसरी रेजिमेंट समय से पहले भारत पहुंच रही है. सूत्रों के मुताबिक दूसरी रेजिमेंट के कुछ हिस्से भारत पहुंच गए हैं और इस महीने के अंत तक पूरी रेजिमेंट भारत पहुंचने की संभावना है.

दूसरी रेजिमेंट से भारत को मिलेगी और मजबूती

पहली रेजिमेंट दिसंबर 2021 में भारत पहुंची थी और दूसरी रेजिमेंट के इस साल जून तक भारत पहुंचने की संभावना जताई गई थी. इस नई रेजिमेंट को उत्तर-पूर्वी भारत में चीनी सीमा के पास तैनात करने की संभावना है. उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक S-400 की दूसरी रेजिमेंट के भारत पहुंचने के साथ ही उत्तर-पश्चिमी सीमा के साथ-साथ उत्तर-पूर्वी सीमा पर भी एयर डिफेंस पूरी तरह अभेद्य (Impenetrable) हो जाएगा. इस दूसरी रेजिमेंट को चीन की सीमा के पास उत्तर-पूर्व में तैनात किया जा सकता है.

भारत की सबसे कमजोर कड़ी है चिकन नेक

भारत के पूर्वोत्तर राज्य पतले सिलीगुड़ी कॉरीडोर से बाकी देश से जुड़े हुए हैं. यहां से चीन की चुंबी वैली (Chumbi Valley) ज्यादा दूर नहीं है. इसलिए ये चिकन नेक (Chicken Neck) भारत की सुरक्षा की सबसे कमजोर कड़ी है. वर्ष 2017 में चीन ने भूटान के डोकलाम (Doklam) इलाके में आगे बढ़ने की कोशिश की थी जिसे भारत ने रोक दिया था. इसके बाद 72 दिन तक दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने रही थीं. खबरों के मुताबिक चीन इस इलाके में अपनी ताकत दोबारा मजबूत कर रहा है और यहां से हवाई हमले का खतरा हमेशा बना हुआ है.

पहली रेजिमेंट की वजह से इन क्षेत्रों में बढ़ी भारत की ताकत

S-400 की पहली रेजिमेंट को पंजाब और कश्मीर सीमा पर होने वाले किसी भी हवाई हमले की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैनात किया गया है. यहां पठानकोट के पास से होकर भारत को जम्मू-कश्मीर से जोड़ने वाला रास्ता गुजरता है. इसलिए पाकिस्तान ने हर लड़ाई में यहां पर भारी हमला किया था.

दुश्मन के हवाई हमले को तबाह करेगा S-400

भारत ने 5 अक्टूबर 2018 को रूस के साथ लगभग 39,000 करोड़ रुपये में S-400 की 5 रेजिमेंट्स का सौदा किया था. S-400 की हर रेजिमेंट में 8 लॉन्चर्स होते हैं जिनमें से हर लॉन्चर एक बार में 4 मिसाइल फायर कर सकता है. यानी एक रेजिमेंट एक बार में 32 मिसाइलें फायर कर सकता है जिनकी रेंज 500 मीटर से लेकर 400 किमी तक होती है. S-400 एयर डिफेंस सिस्टम 600 किमी की दूरी से दुश्मन के किसी भी हवाई हमले को ट्रैक करना शुरू कर देता है और रेंज में आने पर उसे अचूक फायर से तबाह कर देता है.

भारत ने इसलिए किया यह सौदा

S-400 एयर डिफेंस सिस्टम बैलेस्टिक मिसाइल से लेकर फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर यहां तक कि एक छोटे ड्रोन को भी तबाह करने की क्षमता रखता है. S-400 दुनिया के सबसे अच्छे एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है और भारत ने अमेरिका के सारे दबावों के बावजूद इसका सौदा किया है.

 

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