लखनऊ (मानवीय सोच) भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों में लोगों को बिजटी संकट का सामना करना पड़ सकता है। इस बार मॉनसून से काफी पहले अप्रैल में ही थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक कम होने लगा है। मॉनसून के दौरान यह संकट और भी अधिक बढ़ जाएगा, जब बारिश और बाढ़ की वजह से इसके खनन-परिवहन में बाधा उत्पन्न होती है।
एक अधिकारी ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर कहा, ”थर्मल प्लांट्स में हर साल मॉनसून के दौरान जून से सितंबर के बीच कोयले की कमी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार कोयले की कमी अप्रैल में ही शुरू हो गई है, क्योंकि कोल प्लांट्स से इन्हें ढोने वाले वैगन्स की कमी के कारण कम आपूर्ति हो रही है। बारिश और बाढ़ के दौरान स्थिति और भी खराब हो सकती है और बिजली का संकट उत्पन्न हो सकता है।”
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (यूपीपीसीएल) के चेयरमैन एम देवराज ने कहा कि थर्मल प्लांट्स मानक के मुताबिक कोयले का स्टॉक कायम रखने में विफल हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इससे बिजली उत्पादन पर असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा, ”हम कोयले का स्टॉक बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं और सड़के के रास्ते भी ढोया जा रहा है।”
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि कोयले की कमी से बिजली उत्पादन पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसने यूपीपीसीएल को गांवों और छोटे शहरों में बिजली कटौती पर मजबूर किया है। उन्होंने एक आंतरिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (यूपीआरवीयूएनएल) के हरदुआगंज, परीछा और ओबरा में थर्मल प्लांटों में इस साल अप्रैल में 13 मिलियन यूनिट कम उत्पादन हुआ है, क्योंकि प्लांट्स को पूरी क्षमता से चलाने के लिए कोयले की उपलब्धता का अभाव है।
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के थर्मल प्लांट्स में कोयले का स्टॉक अप्रैल में गंभीर और बेहद गंभीर स्थिति में रहा है। पावर प्लांट में कोयले के स्टॉक को गंभीर तब कहा जाता है जब 5 से 7 दिन का स्टॉक बचा हो या समान्य स्तर के 25 फीसदी से कम हो।
