मऊ : (मानवीय सोच) 18 साल पहले हुए दंगे के बीच गैंगरेप की घटना को लेकर केस दर्ज हुआ था. इस मामले में 15 लोग नामजद थे. लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. इस दौरान वकील ने कहा कि यह फर्जी केस मुख्तार अंसारी के इशारे पर दर्ज हुआ था.उत्तर प्रदेश के मऊ में 18 साल पहले हुए दंगों के दौरान गैंगरेप की घटना में शामिल सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है.
सीबीआई कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है. बता दें कि मऊ में हुए दंगों के दौरान गैंगरेप की घटना सामने आई थी, इसमें 15 लोग नामजद थे. कल देर शाम लखनऊ सीबीआई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. जानकारी के अनुसार, 14 अक्टूबर 2005 को भारत मिलाप कार्यक्रम के दौरान मऊ में दंगा भड़क गया था. आरोप लगा था कि तत्कालीन विधायक मुख्तार अंसारी के इशारे पर गैंगरेप का फर्जी केस मऊ कोतवाली में दर्ज कराया गया था. इस मामले में 4 अक्टूबर 2010 को सीबीआई ने 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.
