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रूस के खिलाफ नाटो के प्लान पर अड़ गया तुर्की

नई दिल्ली  (मानवीय सोच)  फिनलैंड और स्वीडन ने 18 मई को नाटो गठबंधन में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आवेदन किया है। फिनलैंड और स्वीडन के इस कदम से तुर्की भड़का हुआ है। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने कहा है कि स्वीडन को तुर्की को आतंकवादियों को वापस किए बिना नाटो से जुड़ने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि स्वीडन और फिनलैंड के प्रतिनिधिमंडल तुर्की आने की हिमाकत न करें।इससे पहले एर्दोगन ने कहा था कि वह कुर्द आतंकियों पर अंकारा के रुख के कारण स्वीडन और फिनलैंड को नाटो में शामिल होने की इजाजत नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों में आतंकवाद के खिलाफ एक स्पष्ट रुख की कमी है और स्वीडन आतंकी संगठनों के लिए एक घोंसला जैसा है।

लेकिन तुर्की फिनलैंड और स्वीडन के विरोध में क्यों है?

एर्दोगन ने कहा है कि तुर्की नाटो में शामिल होने के लिए तुर्की पर ‘प्रतिबंध’ लगाने वाले देशों को इजाजत नहीं देगा। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट बताती है कि तुर्की का यह कदम नाटो सहयोगियों के खिलाफ एर्दोगन की गहरी नाराजगी का सबूत है। तुर्की नाटो देशों से कुर्द आतंकियों के बारे में अंकारा की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लेने को लेकर चिंतित रहा है। तुर्की चाहता है कि नाटो देश तुक्री पर खतरे को स्वीकार करें और इसे लेकर गठबंधन में सामंजस्य स्थापित किया जाना चाहिए।

सिर्फ तुर्की के रोकने से रुक जाएगी फिनलैंड और स्वीडन की एंट्री?

बता दें कि तुर्की खुद नाटो का अहम सदस्य है और कोई भी देश नाटो में तभी शामिल हो सकता है जब सभी मौजूदा सदस्य सहमत हों।  ऐसे में तुर्की के समर्थन के बिना फिनलैंड और स्वीडन नाटो देश नहीं बन सकते हैं। एर्दोआन ने यह भी आरोप लगाते हुए कहा कि हम उनके लिए ‘हां’ नहीं कह सकते हैं जिन्होंने तुर्की में वांछित आतंकवादियों को प्रत्यर्पित करने से भी इनकार किया है।

एक साल में नाटो से जुड़ सकते हैं स्वीडन और फिनलैंड?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट बताती है कि नाटो देशों द्वारा स्वीडन और फिनलैंड के इस अनुरोध का अनुमोदन करने में एक साल तक का वक्त लग सकता है।  स्वीडन और फिनलैंड के नाटो में एंट्री को लेकर तुर्की के विरोध को लेकर नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा है कि इन मसलों को सुलझाया जा सकता है।

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