एक देश, एक चुनाव के प्रस्ताव को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. रिपोर्टे के मुताबिक, केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में इसे लेकर बिल लाएगी. यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए अपने संबोधन में ‘एक देश, एक चुनाव’ की बात करने के बाद सामने आया है मोदी ने तर्क दिया था कि बार-बार चुनाव होने से देश की प्रगति में बाधा उत्पन्न होती है.इससे पहले ही सूत्रों के हवाले से बताया था
BJP नीत मौजूदा NDA सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल में ही ‘एक देश, एक चुनाव’ को लागू करेगी. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के तीसरे कार्यकाल के 100 दिन पूरे होने पर सूत्रों ने बताया था कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर एकजुटता शेष कार्यकाल में भी बनी रहेगी. हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव से पहले BJP की तरफ से जारी घोषणापत्र में भी ‘एक देश, एक चुनाव’ को प्रमुख वादों के रूप में शामिल किया था. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने इस साल मार्च में पहले कदम के रूप में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की. समिति ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के
100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाने की भी सिफारिश की इसके अलावा, विधि आयोग सरकार के सभी तीन स्तरों लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों जैसे नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए 2029 से एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश कर सकता है. वह सदन में अविश्वास प्रस्ताव या अनिश्चितकाल तक बहुमत नहीं होने की स्थिति में एकता सरकार का प्रावधान करने की सिफारिश कर सकता है. हालांकि कोविंद समिति ने एक साथ चुनाव कराने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की. उसने 18 संवैधानिक संशोधन करने की सिफारिश की, जिनमें से अधिकांश को राज्य विधानसभाओं के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी.
