जम्मू कश्मीर में बुलडोजर एक्शन को लेकर सियासत तेज हो गई है. जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) ने जम्मू शहर में विस्थापित कश्मीरी पंडितो की करीब आधा दर्जन दुकानों पर बुलडोजर चला दिया. जिसको लेकर कथित तौर पर कोई नोटिस भी नहीं जारी किया गया था. इसके बाद दुकानदारों के साथ मिलकर कई वर्गों ने विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. अधिकारियों ने बताया कि पुरानी दुकानें जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) की जमीन पर बनी थीं.
इस मामले पर विपक्षी पार्टियों ने जम्मू कश्मीर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है.अधिकारियों ने PTI को बताया कि बुधवार, 20 नवंबर को जम्मू कश्मीर प्राधिकरण (JDA) ने विस्थापित कश्मीरी पंडितो की दुकानों पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया. ये दुकानें JDA की जमीन पर करीब तीन दशक पहले बनाई गई थीं, जो मुथी कैंप के पास थी. रिलीफ कमीश्नर अरविंद करवानी ने जगह का दौरा कर दुकानदारों को मदद का आश्वासन दिया. उन्होंने बताया कि मुथी कैंप फेज-2 में शॉपिंग कॉम्पलेक्स बनाने के टेंडर जारी किए गए हैं.
जल्द ही नई 10 दुकानें बनाई जाएंगी और दुकानदारों को दी जाएंगी मुथी प्रवासी शिविर अध्यक्ष अनिल भान ने इस घटना की आलोचना की. उन्होंने कहा कि दुकानें तोड़ने से पहले एक महीने इंतजार करना चाहिए था. राहत विभाग पहले से ही इन दुकानदारों के लिए नई दुकानें बना रहा था. एक ध्वस्त दुकान के मालिक कुलदीप किसरू ने बताया कि हमें बेहतर सुविधाएं और वित्तीय सहायता प्रदान करने के बजाय इस सरकार ने हमारी दुकानों को बुलडोजर से गिराकर हमारी रोटी छीन ली है.
