रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक में कुछ अहम फैसले लिए है। शक्तिकांत दास ने कहा है कि दूसरी छमाही में ग्रोथ रेट पहली छमाही के मुकाबले में बेहतर रहने की उम्मीद की जा रही है। वित्त वर्ष के लिए इकोनॉमिक ग्रोथ रेट के अनुमान में कटौती होने की बात कही है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में ग्रोथ के अनुमान को काफी कम करके 6.6 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई ने पहले इसके 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। ग्रोथ अनुमान में कटौती दूसरी तिमाही में ग्रोथ रेट के 7 तिमाहियों में सबसे कम 5.4 प्रतिशत पर आने के बाद की गई है। यह पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में दर्ज 6.7 प्रतिशत की बढ़त से भी कम थी।
चालू वर्ष यानी वित्त वर्ष 2024-25 के पहले 6 महीनों में 6 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है। आरबीआई गवर्नर दास ने द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आने वाले समय में दूसरी छमाही चालू वित्त वर्ष यानी वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही से बेहतर दिख रही है। दूसरी छमाही के बेहतर अनुमान बेहतर खरीफ उत्पादन, उच्च जलाशय स्तर और बेहतर रबी बुवाई पर आधारित है। इसके अलावा आने वाले समय में इंडस्ट्रियल एक्टिविटी सामान्य होने और पिछली तिमाही के सबसे निचले स्तर से उबरने की भी उम्मीद है। मानसून से संबंधित व्यवधानों के बाद खनन और बिजली के भी सामान्य होने की उम्मीद है।
दास ने मुद्रास्फीति के संबंध में कहा कि इसे टिकाऊ वृद्धि को ध्यान में रखते हुए नीचे लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि मुद्रास्फीति ने सरपट भागने की पूरी कोशिश की है, हमारा प्रयास इसे कसकर बांधे रखना है। इसमें जल्दबाजी में प्रतिक्रिया करने की कोई गुंजाइश नहीं है। हमें कोई भी कार्रवाई करने से पहले अन्य साक्ष्यों की जरूरत है और कार्रवाई समय पर होनी चाहिए। दास ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी मुद्रास्फीति और वृद्धि के बीच संतुलन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आरबीआई मुद्रास्फीति एवं वृद्धि के संतुलन को बहाल करने के लिए परिवेश बनाने को लेकर अपने विभिन्न नीतिगत साधनों का उपयोग करेगा।
