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साधारण से टीचर ने लड़ा चुनाव, पहली ही बार में बन गए विधायक

नई दिल्ली  (मानवीय सोच) लोकतंत्र की खूबसूरती ही यह है कि यहां एक साधारण सा व्यक्ति भी देश के बड़े पद पर बैठ सकता है. इसके लिए जरूरी है जनता का विश्वास. हाल ही में आए नतीजों ने भी ऐसा ही कमाल दिखाया है. इस चुनाव में कई बड़े दिग्गज हारते दिखे तो कई ऐसे लोगों को जनता ने जिताया जो कि राजनीति में बिल्कुल नए हैं.

टीचर से विधायक तक का सफर

ऐसे ही एक कहानी है पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली के चकिया सुरक्षित सीट से भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक कैलाश खरवार की. पेशे से सरकारी अध्यापक रहे कैलाश खरवार ने 2022 के विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की है. कैलाश खरवार भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे और उन्होंने पहली ही बार में जीत मिली है.

पार्टी ने इसलिए जताया भरोसा

कैलाश खरवार मूल रूप से चकिया विधान सभा के सिकंदरपुर इलाके के उदयपुर गांव के रहने वाले हैं. आपको बता दें कि भाजपा का उन पर भरोसा जताने का मुख्य कारण है RSS. बेहद साधारण व्यक्तित्व के कैलाश खरवार पिछले 40 साल से अधिक वक्त से RSS से जुड़े हुए हैं.

रिटायरमेंट से पहले छोड़ी नौकरी

कैलाश खरवार पहले सरस्वती शिशु मंदिर में अध्यापक थे. उसके बाद उनकी नौकरी सरकारी स्कूल में लग गई. जहां पर वह सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत थे. कैलाश खरवार को इसी मार्च के महीने मे इनको रिटायर होना था, लेकिन जब भाजपा ने इनको चकिया सुरक्षित सीट से अपना प्रत्याशी बनाया तो नियमानुसार इन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी.

साइकिल से तय किया लंबा सफर!

बता दें कि कैलाश खरवार के पास सिर्फ एक साइकिल थी लेकिन बाद में उन्होंने स्कूटी खरीदी. आज की तारीख में इनके पास वाहन के नाम पर सिर्फ एक पुरानी स्कूटी है जिससे वह स्कूल आया-जाया करते थे. इस स्कूटी को भी उन्होंने साल 2016 में खरीदा था. यह भी उन्होंने तब खरीदी जब बढ़ती उम्र के साथ इनको साइकिल चलाने में दिक्कत होने लगी थी.

कई चुनौतियों का किया सामना

हालांकि उनके सामने तमाम चुनौतियां थीं. उनके सामने चुनाव लड़ने में तकनीकी समस्या ये आ रही थी कि कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी करते हुए चुनाव नहीं लड़ सकता. लिहाजा कैलाश खरवार ने रिटायरमेंट के कुछ दिन पहले नौकरी से वीआरएस ले लिया. यह फैसला लेना भी कठिन था क्योंकि रिटायरमेंट भी वो ऐसे समय में ले रहे थे जबकि उनकी जीत भी सुनिश्चित नहीं थी. ऐसे में अगर वो हार जाते तो उन्हें बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ सकता था.

सपा के अनुभवी प्रत्याशी से कड़ी टक्कर

उनके सामने समाजवादी पार्टी ने जितेंद्र कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया. जितेंद्र कुमार कई साल पहले बसपा में थे और बसपा से विधायक भी चुने गए थे. राजनैतिक रूप से कैलाश खरवार की पहचान अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी अलग थी. लेकिन कैलाश खरवार ने अपने उसी पहचान के बल पर जीत हासिल की जिसके लिए वह जाने जाते थे.

करीबी मुकाबले में मिली जीत

इस चुनाव में कैलाश खरवार को कुल 97,812 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के जितेंद्र कुमार को 88,561 वोट मिले. वहीं इस चकिया सुरक्षित सीट से बहुजन समाज पार्टी के विकास कुमार को 44,530 मत मिले.

सरल स्वभाव के धनी हैं कैलाश

कैलाश खरवार के परिवार में पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां हैं, जिनमें एक बेटी की शादी हो चुकी है. बताया जाता है कि कैलाश खरवार बेहद ही साधारण व्यक्तित्व के मालिक हैं. बेहद सज्जन हैं और हर किसी के सुख-दुख में शामिल रहते हैं. किसी की भी जरूरत पड़ी तो यह साइकिल और झोला उठाकर उसकी मदद के लिए निकल पड़ते थे.

 

 

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