वाराणसी (मानवीय सोच) सावन के पहले दिन बृहस्पतिवार ही काशी में कांवड़ियों का आना शुरू हो गया है। बुधवार की देर रात से ही बड़ी संख्या में कांवरियां पहुंच गए। कुछ ने गंगा घाटों को आसरा बनाया तो कुछ ने कांवड़िया शिविरों में रात बिताई। गुरुवार की सुबह से ही विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन के लिए पहुंचने लगे।
कोरोना के कारण दो साल के अंतराल के बाद हो रही इस कांवड़ यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह है। माना जा रहा है कि इस बार पिछले कई रिकॉर्ड टूटेंगे। विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद से यहां लगातार भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। कॉरिडोर का लोकार्पण होने के बाद पहले सावन में भक्तों की सुविधा के लिए कई इंतजाम किये गए हैं।
कांवड़ियों के लिए एनएच-2 की एक लेन सुरक्षित
सावन में काशी आने वाले बाबा भक्तों के लिए एनएच-2 का उत्तरी लेन बुधवार आधी रात से रिजर्व कर दिया गया है। 13 अगस्त तक 69 किमी लंबी बाईं लेन पर वाहन नहीं चलेंगे। पूर्वांचल के अन्य जिलों के श्रद्धालुओं के लिए भी रूट चार्ट तैयार हैं। बनारस से सटे जिलों में यह व्यवस्था शनि-रवि और सोम को लागू होगी।
वाराणसी-जौनपुर राजमार्ग पर 63 किमी तक बाईं लेन भी बंद कर दी गई है। प्रतिबंधित लेन का 28 किमी वाराणसी और 35 किमी जौनपुर में पड़ता है। एनएच पर कांवरियों की सुरक्षा में 1300 जवान तैनात होंगे। जौनपुर मार्ग पर भी 150 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। एक दर्जन से अधिक स्थानों पर स्वास्थ्य कैंप लगाए गए हैं। इसके अलावा दर्जन भर एंबुलेंसों की भी तैनाती की गई है। राजमार्ग के किनारे पड़ने वाले गांवों के मोड़ पर बैरिकेडिंग की गई है।
गंगा घाटों पर एनडीआरएफ करेगी पेट्रोलिंग
सावन में एनडीआरफ की टीम खिड़किया घाट से लेकर रामनगर तक पेट्रोलिंग करेगी। राजघाट और दशाश्वमेध घाट पर स्थायी टीम रहेगी। सावन के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। एक टीम में 20 जवान रहेंगे। इसके साथ ही 21 नावों से टीमें पेट्रोलिंग करेगी। वहीं जल पुलिस, स्थानीय थाना पुलिस, पीएसी की भी ड्यूटी लगाई गई है।
