केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के पीआईसीयू वार्ड में डायलिसिस के दौरान लापरवाही बरतने से बच्चे के गले में गंदगी फंस गई। सांस लेने में दिक्कत होने पर परिजन ने स्टाफ से गुहार लगाई। विश्राम कक्ष जाकर गिड़गिड़ाए लेकिन वहां सो रहे डॉक्टर नहीं उठे, नर्स मोबाइल पर खेलती रही। परिजन के गिड़गिड़ाने पर मरीज को देखने के बजाए स्टाफ हंसता रहा। कुछ देर बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया। घटना का झकझोर देने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
लापरवाही के आक्रोशित परिजन ने अस्पताल में हंगामा किया। उन्होंने केजीएमयू प्रशासन से डॉक्टरों और स्टाफ की लिखित शिकायत भी की है। गोरखपुर के नंदानगर निवासी जीतेंद्र यादव शटरिंग का काम करते हैं। उनके बेटे अभ्युदय (नौ माह) के शरीर पर रैशेज पड़ गए थे। जीतेंद्र ने बेटे को डॉक्टर माला कुमार की देखरेख में 28 मई को जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया था। करीब एक सप्ताह बाद उसे छुट्टी दे दी गई। बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ था।
कुछ दिनों बाद ही निमोनिया की शिकायत हुई। बच्चे को दोबारा से छह जून को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर लाए। यहां आईसीयू में बेड खाली न होने की वजह बता कर लौटा दिया गया। परिजन उसे लेकर गोमतीनगर स्थिति निजी अस्पताल ले गए। पिता के मुताबिक यहां पैसे अधिक लग रहे थे। इसके बाद 14 जून को ट्रॉमा के पीडियाट्रिक वार्ड के पीआईसीयू में भर्ती कराया।
मामा प्रवीण यादव ने बताया कि हालत बिगड़ने पर डॉक्टर ने 72 घंटे की डायलिसिस की सलाह दी। इसके लिए 28-28 हजार कीमत की दो किट और 17 हजार का डायलिसिस में इस्तेमाल होने वाला पानी मंगाया। आरोप है कि गुरुवार रात नर्स ने यू ट्यूब पर देखकर डायलिसिस मशीन को ऑपरेट किया। बच्चे के शरीर का खून मशीन में जाने के बाद मशीन बंद हो गई। वापस खून बच्चे के शरीर में नहीं जा सका। काफी खून अलग बह गया, उसे स्टाफ ने कूड़े में फेंकवा दिया।
