लखनऊ : (मानवीय सोच) स्टीयरिंग फेल होना, ब्रेक का काम नहीं करना, इंजन से धुंआ उठना, एसी कूलिंग ठप होने जैसी शिकायतें रोडवेज बसों में आम बात हैं। ऐसी शिकायतों पर विराम लगे भी तो कैसे, जब मरम्मत के लिए पर्याप्त मैकेनिक ही नहीं हैं। रोडवेज में मैकेनिक के करीब 78 फीसदी पद खाली हैं। यह हाल प्रदेश के सभी 115 बस डिपो का है। हाईटेक बसों की मरम्मत के लिए तो विशेषज्ञ मैकेनिक ही नहीं हैं। सभी डिपो हाईटेक बसों की मरम्मत करने वाले कर्मियों की कमी से जूझ रहे हैं।
मरम्मत न होने से बड़ी संख्या में बसें डिपो से ही नहीं निकल नहीं पाती हैं। इससे रोडवेज को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। सभी डिपो में ढाई हजार बीएस-4 व बीएस-6 मॉडल की बसों के इंजन बनाने वाले मैकेनिक ही नहीं हैं। मैकेनिकों के कुल 11619 पदों में सिर्फ 2470 पदों पर तैनाती है। 9149 पद खाली हैं। अफसर बताते हैं कि वर्तमान में तैनात मैकेनिकों में तमाम की उम्र पचास पार हो चुकी है, जिससे काम प्रभावित हो रहा है। आउटसोर्स से जिन कर्मचारियों को भर्ती किया गया है
