एकनाथ शिंदे SC के फैसले से खुश

महाराष्ट्र (मानवीय सोच)  जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर एकनाथ शिंदे ने ट्वीट किया है। अदालत की ओर से बागी 15 विधायकों की अयोग्यता पर 12 जुलाई तक के लिए रोक लगा दी है। इससे एकनाथ शिंदे उत्साहित नजर आ रहे हैं। शिवसेना के बागी विधायक ने फैसले के बाद ट्वीट कर इसे बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व की जीत बताया है। उन्होंने मराठी में ट्वीट किया, जिसका अर्थ यह है, ‘यह हिंदुत्व सम्राट बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व और धर्मवीर आनंद दिघे साहब के विचारों की जीत है…।’ इसके साथ ही उन्होंने हैशटैग ‘असली शिवसेना की जीत’ भी लिखा है।

अपने गुट को असली शिवसेना बताने से साफ है कि वह पार्टी पर दावा ठोक रहे हैं। एकनाथ शिंदे गुट का कहना है कि शिवसेना के दो तिहाई से ज्यादा विधायक उनके समर्थन में हैं। ऐसे में पार्टी पर उनका ही हक बनता है। इससे पहले भी वह कई बार पार्टी पर अपने दावे की बात कर चुके हैं। यही नहीं डिप्टी स्पीकर की ओर से बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने वाले नोटिस को लेकर भी उनका कहना था कि यह गलत है क्योंकि बहुमत ही उनके साथ है। एक तरफ एकनाथ शिंदे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को असली शिवसेना की जीत करार दिया है तो वहीं शिवसेना खेमे से संजय राउत या उद्धव ठाकरे समेत किसी भी नेता का बयान सामने नहीं आया है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कै फैसले के बाद से भाजपा भी सक्रिय है। पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस के घर पर भाजपा की कोर कमेटी की बैठक चल रही है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल भी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। इस बीच शिवसैनिकों का गुस्सा सड़क पर देखने को मिल रहा है। सोमवार को निर्दलीय विधायक विनोद अग्रवाल के दफ्तर पर हमला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि वह सभी विधायकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाए। बता दें कि विनोद अग्रवाल भाजपा के समर्थक हैं और बागी एकनाथ शिंदे गुट का भी समर्थन कर रहे हैं।

अपने ही खिलाफ प्रस्ताव में जज कैसे बने डिप्टी स्पीकर: SC

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर के नोटिस पर सवाल खड़े किए हैं। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर की ओर से पेश वकील राजीव धवन से सवाल किया कि यदि विधायकों की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस मिला था तो फिर उसे खारिज क्यों किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अपने खिलाफ मामले में उन्होंने कैसे खुद ही सुनवाई की और खुद ही जज बन गए।

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